3 जनवरी को विनायकी चतुर्थी पर करें गणेश स्त्रोत का पाठ, दूर होगी हर परेशानी

Published : Jan 02, 2025, 10:17 AM IST
ganesh stotra

सार

Vinayki Chaturthi January 2025: साल 2025 का पहला विनायकी चतुर्थी व्रत 3 जनवरी, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन यदि कुछ खास उपाय किया जाए तो कईं तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है। ये उपाय बहुत ही आसान हैं, जो कोई भी कर सकता है। 

धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। इस बार ये व्रत 3 जनवरी, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन यदि गणेश स्त्रोत का पाठ किया जाए तो हर तरह की परेशानी से बचा जा सकता है। इस स्त्रोत पाठ करना बहुत ही आसान है। जानें कैसे करें गणेश स्त्रोत का पाठ…

गणेश स्त्रोत पाठ करने की विधि

- 3 जनवरी, शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और गणेश स्त्रोत पाठ करने का संकल्प लें। मन में कोई इच्छा हो तो वह भी बोलें।
- इसके बाद भगवान श्रीगणेश की पूजा करें। कुमकुम से तिलक लगाएं। फूलों की माला पहनाएं। गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- दूर्वा आदि चीजें चढ़ाएं एक-एक करकें श्रीगणेश को चढ़ाएं। पूजा के बाद कुशा के आसन पर बैठकर गणेश स्त्रोत का पाठ करें।
- पाठ के दौरान दीपक जलते रहना चाहिए। पाठ पूरा होने के बाद भगवान श्रीगणेश को मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
- इस प्रकार गणेश स्त्रोत का पाठ विधि-विधान से करने से परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है। ये पाठ आप रोज भी कर सकते हैं।

गणेश स्तोत्र

प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥॥
प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥॥
नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥॥
जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥॥
॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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