कब करें दशा माता व्रत 2025, क्यों करते हैं ये व्रत? जानें पूजा विधि, आरती और कथा

Published : Mar 21, 2025, 08:12 PM IST
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सार

Dasha Mata 2025: चैत्र मास में दशा माता की पूजा की परंपरा है। ऐसा करते हैं कि जो व्यक्ति दशा माता की पूजा करती है, उसकी दशा यानी स्थिति में सुधार होती है और परेशानियां कम होती हैं। 

Dasha Mata Vrat 2025 Details In Hindi: पुराणों के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता की पूजा करनी चाहिए। दशा माता देवी पार्वती का ही एक रूप हैं। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में दशा माता की पूजा होती है, वहां की दशा यानी स्थिति में सुधार होता है और वहां की परेशानियां भी धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। दशा माता के पूजन में त्रिवेणी (पीपल, बरगद और नीम) की पूजा भी की जाती है। आगे जानिए कब है दशा माता व्रत, इसकी पूजा विधि व अन्य खास बातें…

कब है दशा माता पूजन 2025?

पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 24 मार्च, सोमवार की सुबह 05 बजकर 38 से शुरू होगी, जो 25 मार्च, मंगलवार की सुबह 05 बजकर 05 मिनिट तक रहेगी। चूंकि दशमी तिथि का सूर्योदय 24 मार्च की सुबह होगा, इसलिए इसी दिन दशा माता का पूजन किया जाएगा। इस दिन परिघ और शिव नाम के 2 शुभ योग दिन रहेंगे।

दशा माता 2025 शुभ मुहूर्त

- सुबह 06:30 से 08:01 तक
- सुबह 09:31 से 11:02 तक
- दोपहर 12:08 से 12:57 (अभिजीत मुहूर्त)

दशा माता पूजन की विधि (Dasha Mata Puja and Vrat Vidhi)

- 24 मार्च, सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। दोपहर 12 बजे से पहले दशा माता की पूजा कर लेनी चाहिए।
- इस व्रत में त्रिवेणी यानी पीपल, नीम और बरगद के पेड़ों की पूजा की जाती है। इन पेड़ों को देवताओं का स्वरूप माना जाता है।
- सबसे पहले त्रिवेणी वृक्षों के नीचे शुद्ध घी का दीपक लगाएं। अबीर, गुलाल, कुंकुम, चावल, फूल आदि चीजें एक-एक कर चढ़ाएं।
- इसके बाद जल चढ़ाएं और इन वृक्षों की परिक्रमा करें। वृक्षों के नीचे बैठकर नल-दमयंती की कथा सुनें। इस दिन बिना नमक का भोजन करें।
- इस प्रकार जो दशा माता की पूजा करता है, उसकी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

ये है दशा माता व्रत की कथा (Dasha Mata Vrat Katha)

- किसी समय नल नाम के एक राजा थे। वे बहुत ही पराक्रमी और दानवीर थे। दमयंती उनकी पत्नी थी। एक बार रानी दमयंती ने दशा माता का व्रत किया और पूजा का धागा गले में बांध लिया। राजा ने उस धागे को निकालकर फेंक दिया।
- उसी रात दशा माता ने राजा के सपने में आकर कहा कि ‘तूने मेरा अपमान किया है, इसलिए तेरा अच्छा समय जा रहा है।’ इसके बाद किसी वजह से राजा के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें अपनी पत्नी के साथ वन-वन में भटकना पड़ा।
- फिर एक दिन राजा को सपने में फिर दशा माता दिखाई दी। राजा ने उनसे अपने किए की माफी मांगी और समय आने पर पत्नी सहित उनकी पूजा भी की। राजा नल के ऐसा करने से उन्हें अपना राज्य पुन: मिल गया।

ये है दशा माता की आरती (Dasha Mata Aarti)

आरती श्री दशा माता की ।
जय सत-चित्त आनंद दाता की।
भय भंजनि अरु दशा सुधारिणी ।
पाप -ताप-कलि कलुष विदारणी।
शुभ्र लोक में सदा विहारणी ।
जय पालिनी दिन जनन की ।
आरती श्री दशा माता की ।
अखिल विश्व- आनंद विधायिनी ।
मंगलमयी सुमंगल दायिनी ।
जय पावन प्रेम प्रदायिनी ।
अमिय-राग-रस रंगरली की ।
आरती श्री दशा माता की ।
नित्यानंद भयो आह्लादिनी ।
आनंद घन आनंद प्रसाधिनी।
रसमयि रसमय मन- उन्मादिनी ।
सरस कमलिनी विष्णुआली की ।
आरती श्री दशा माता की ।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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