
Vrat Katha Special: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब कोई भी सुहागन महिला व्रत रखती है, तो अनेक लाभ उन्हें प्राप्त होते हैं। इतना ही नहीं, इसका असर उनके परिवार के बाकी सदस्यों को भी मिलता है। महिलाओं के व्रत रखने से उनकी आत्मा शुद्ध होती है, आध्यात्मिक विकास होता है और साथ ही आत्म-अनुशासन बढ़ता है। इस बात का जिक्र खुद कथावचक प्रदीप मिश्रा करते हुए दिखाई दिए हैं।
कथावचक प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जब माताएं कोई भी व्रत रखती हैं, तो उस व्रत का विधान स्कंद पुराण में बताया गया है। उसमें बताया गया है कि जब नारी शादी के बाद अपने पति के घर में रहकर पूजा-पाठ, भजन, दर्शन, दान आदि करती हैं, तो उसका सीधा आधा फल उनके पति और बच्चों को प्राप्त होता है। अर्थात, महिलाएं जब कोई भी धार्मिक कार्य वो करती हैंं तो उसका सीधा असर परिवार से जुड़े हर व्यक्ति पर असर पड़ता है।
16 सोमवार व्रत
ये व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है। कहा जाता है कि ये व्रत जो भी महिला करती है उसका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है।
वट सावित्री व्रत
वट सावित्री व्रत शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं।
हरियाली तीज
भगवान शिव और माता पार्वती को ये व्रत समर्पित होता है। माना जाता है कि यह व्रत महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्रदान करता है।
नवरात्रि व्रत
ये व्रत माता रानी के 9 रूपों को समर्पित है। माना जाता है कि यह व्रत महिलाओं को शक्ति के साथ सुख और समृद्धि प्रदान करता है।
करवा चौथ व्रत
इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत रखती हैं।
निर्जला एकादशी
ये व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसा कहा जाता है कि जो कोई भी इस व्रत को करता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
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