
Raksha Bandhan 2026 Date: रक्षा बंधन सिर्फ भाई-बहन के प्यार का त्योहार नहीं है, बल्कि इसके साथ कई धार्मिक परंपराएं व मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। इस बार रक्षा बंधन का पर्व 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं। ऐसा करते समय एक खास मंत्र बोला जाता है। इस मंत्र का एक विशेष महत्व और कथा भी है जो इसे और भी खास बनाती है। आगे जानिए कौन-सा है वो मंत्र, उसका महत्व और कथा...
राखी बांधते समय यह मंत्र बोलना चाहिए। इस मंत्र और इसका महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। राखी ही नहीं मौली बांधते समय भी ये मंत्र बोला जाता है-
येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
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अर्थ- जिस रक्षा सूत्र से दानवराज राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा सूत्र! तुम कभी विचलित मत होना, अपनी जगह से मत हटना और अपनी रक्षा का भाव बनाए रखना। मंत्र में “मा चल, मा चल” का अर्थ है कि रक्षा सूत्र अपने स्थान से न हटे और सुरक्षा का भाव स्थिर रहे। यानी बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उसके सुख, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करती है।
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पौराणिक कथा के अनुसार राजा बलि भगवान विष्णु के परम भक्त और बहुत शक्तिशाली राजा थे। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर उनसे तीन पग भूमि मांगी थी। राजा बलि ने अपना वचन निभाया और वामन भगवान को तीन पग भूमि देने का संकल्प पूरा किया।
भगवान वामन में 2 पग में ही पूरी सृष्टि नाप दी और तीसरा पैर बलि के सिर पर रखा। बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे पाताल का राजा बना दिया और वरदान मांगने को कहा। तब राजा बलि ने भगवान विष्णु से कहा कि आप भी मेरे साथ पाताल लोक चलें।
वचनबद्ध होने के कारण भगवान विष्णु को भी पाताल जाना पड़ा। तब देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बना लिया और अपने पति यानी भगवान विष्णु को उनसे मांग लिया। कहते हैं कि राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधते समय देवी लक्ष्मी ने ही सबसे पहले ये मंत्र बोला था।
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