
Vijayadashami 2026: इस साल विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। रावण को लेकर कई ऐसी बातें प्रचलित हैं, जिन्हें लोग सच मान लेते हैं। जैसे- रावण ने भगवान शिव से सोने की लंका मांगी थी, वह कभी किसी से नहीं हारा और उसने अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए सीता का हरण किया था। लेकिन इन मान्यताओं से जुड़ी कथाओं में कई दूसरी बातें भी सामने आती हैं। आइए जानते हैं रावण से जुड़े ऐसे ही 5 मिथ और उनसे जुड़ी मान्यताओं का सच।
सच: प्रचलित रामायण कथाओं के अनुसार, सोने की लंका पर पहले रावण के सौतेले बड़े भाई कुबेर का अधिकार था। रावण ने अपनी शक्ति के दम पर कुबेर को हराकर लंका और उनका पुष्पक विमान अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद उसने लंका पर अपना शासन स्थापित किया। इसलिए यह कहना सही नहीं कि रावण ने शिवजी से लंका मांगकर हासिल की थी।
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सच: रामायण की प्रचलित कथा के अनुसार, रावण को नलकुबेर ने श्राप दिया था कि अगर वह किसी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ संबंध बनाने की कोशिश करेगा, तो उसके सिर के टुकड़े हो जाएंगे। मान्यता है कि इसी श्राप के डर से रावण ने सीता के साथ जबरदस्ती नहीं की। हालांकि, सीता का हरण करना भी उसके अधर्म का ही उदाहरण माना जाता है।
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सच: रामायण की अलग-अलग परंपराओं में इस घटना के पीछे अलग-अलग कारण बताए जाते हैं। एक प्रचलित कथा के अनुसार, शूर्पणखा के पति विद्युतजिव्ह की मृत्यु रावण के हाथों हुई थी। बताया जाता है कि रावण का युद्ध कालकेय राजा से हुआ था और इसी दौरान विद्युतजिव्ह मारा गया। कुछ लोककथाओं में शूर्पणखा के मन में रावण के प्रति बदले की भावना होने की बात भी कही जाती है। हालांकि, इसे सभी रामायण संस्करणों में एक जैसा नहीं बताया गया है।
सच: रावण को शक्तिशाली योद्धा माना जाता है, लेकिन प्रचलित पौराणिक कथाओं में उसकी हार के प्रसंग भी मिलते हैं। राजा बलि, महिष्मती के राजा कार्तवीर्य अर्जुन, वानरराज बालि और भगवान शिव से जुड़े प्रसंगों में रावण को पराजित या विवश होते हुए बताया जाता है। इन कथाओं के विवरण अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं।
सच: रावण को वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता, शिवभक्त और शक्तिशाली राजा बताया गया है। लेकिन रामायण में उसके अहंकार, सीता के हरण और दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन करने जैसे कामों की आलोचना भी की गई है। यही वजह है कि उसे विद्वान होने के बावजूद अधर्म के रास्ते पर चलने वाला शासक माना जाता है। रावण की कथा यह संदेश देती है कि केवल ज्ञान और शक्ति होना पर्याप्त नहीं, उनका सही इस्तेमाल करना भी जरूरी है।
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