Vijayadashami 2026: ‘आसछे बोछोर आबार होबे’ का क्या है मतलब? मां दुर्गा की विदाई पर क्यों कहते हैं बंगाली

Published : Oct 17, 2026, 03:01 PM IST
Asche Bochor Abar Hobe Meaning in Hindi

सार

Asche Bochor Abar Hobe Meaning in Hindi: विजयादशमी पर ‘आसछे बोछोर आबार होबे’ क्यों कहते हैं बंगाली? जानिए इस खास वाक्य का हिंदी अर्थ, मां दुर्गा की विदाई से जुड़ी परंपरा और इसके पीछे की भावना।

Vijaya Dashami 2026: इस बार दुर्गा पूजा की दशमी तिथि, जिसे विजयादशमी और दशहरा भी कहा जाता है 20 अक्टूबर 2026, दिन शनिवार को है। इसी दिन मां दुर्गा को विदाई देने और दुर्गा विसर्जन करने की परंपरा निभाई जाती है। दुर्गा पूजा खत्म होने के साथ ही बंगाल में एक बार फिर सुनाई देने लगते हैं तीन खास शब्द- ‘आसछे बोछोर आबार होबे’। हिंदी में इसका मतलब है, ‘अगले साल फिर होगा।’ सुनने में यह एक साधारण वाक्य लगता है, लेकिन बंगाली समाज के लिए इसमें मां दुर्गा की विदाई का दुख, उनके दोबारा आने की उम्मीद और अपनों के साथ त्योहार मनाने की खुशी, तीनों छिपे हैं। विजयादशमी के दिन जब मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के लिए ले जाई जाती है, तब यही शब्द विदाई को एक नई शुरुआत की उम्मीद से जोड़ देते हैं। जानिए ‘आसछे बोछोर आबार होबे’ का मतलब और विजयादशमी पर क्यों कहा जाता है।

क्या है ‘आसछे बोछोर आबार होबे’ का असली मतलब?

बंगाली भाषा के इस वाक्यांश का अर्थ है- अगले साल फिर होगा। दुर्गा पूजा के संदर्भ में यह मां दुर्गा के अगले साल दोबारा आगमन की कामना को जाहिर करता है। यह केवल त्योहार के लौटने की बात नहीं, बल्कि उस आस्था और परंपरा का प्रतीक भी है, जो पीढ़ियों से बंगाली परिवारों को जोड़ती आई है।

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विजयादशमी पर क्यों कहा जाता है यह खास वाक्य?

बंगाली परंपरा में मां दुर्गा को उमा के रूप में भी देखा जाता है, जो अपने बच्चों के साथ मायके आती हैं। दुर्गा पूजा के दौरान उनका आगमन घर में बेटी के आने जैसी खुशी लेकर आता है। वहीं, विजयादशमी पर उनकी विदाई परिवार से बेटी के लौटने जैसी भावुक घड़ी बन जाती है। इसी दिन दुर्गा विसर्जन की रस्म निभाई जाती है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद मां को विदा करते हैं और अगले साल फिर उनके स्वागत की कामना करते हैं। कई समुदायों में विदाई से पहले सिंदूर खेला भी होता है, जिसमें महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और एक-दूसरे को लगाती हैं। हालांकि, इन रस्मों के तरीके अलग-अलग जगहों पर भिन्न हो सकते हैं।

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बंगाली संस्कृति में क्यों खास है ‘आसछे बोछोर आबार होबे’?

दुर्गा पूजा बंगाल में सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार, दोस्तों और समुदाय के साथ जुड़ने का बड़ा अवसर भी है। पंडालों की रौनक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक खानपान और अपनों से मुलाकात की यादें त्योहार के खत्म होने के बाद भी बनी रहती हैं। ऐसे में ‘आसछे बोछोर आबार होबे’ विदाई के दुख को अगले मिलन की उम्मीद में बदल देता है। मां दुर्गा की प्रतिमा भले ही विसर्जित हो जाए, लेकिन उनके प्रति श्रद्धा बनी रहती है। यही वजह है कि विजयादशमी पर बोला जाने वाला यह वाक्य केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भरोसे और भावनाओं का प्रतीक है। मां की विदाई के साथ ही अगले साल उनके स्वागत की उलटी गिनती भी शुरू हो जाती है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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