Sant Ravidas Jayanti 2026 Quotes: शेयर करें संत रविदास के ये 10 दोहे, जीवन को मिलेगी नई दिशा

Published : Feb 01, 2026, 08:29 AM IST
Sant Ravidas Jayanti 2026 Quotes

सार

Sant Ravidas Jayanti 2026 Quotes: इस बार संत रविदास की जयंती 1 फरवरी, रविवार को मनाई जा रही है। संत रविदास भारत के महान विद्वानों में से एक थे, जिन्होंने समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए भरसक प्रयास किए।

Sant Ravidas Jayanti 2026 Quotes and Dohe: हर साल माघ मास की पूर्णिमा तिथि पर संत रविदास की जयंती मनाई जाती है। इस बार ये उत्सव 1 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन संत रविदास के अनुयायी उनकी कही बातों को याद करते हैं। संत रविदास ने अपने जीवन में अनेक दोहों की रचना की। ये दोहे हमारे जीवन को भी नई दिशा दे सकते हैं। संत रविदास की जयंती पर आप भी पढ़ें ये दोहे और अपने दोस्तों, रिश्तेदारों व परिचितों को शेयर करें…

संत रविदास के प्रसिद्ध दोहे

1. अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी।
अवधू कौन दिशा को जाऊं॥
अर्थ: संत रविदास इस दोहे में कहते हैं ‘जब मैंने राम का नाम लेना शुरू कर दिया तो अब इसे छोड़ना असंभव है।


2. काया कोरा कपड़ा, जब लग मैला न होय।
कर्म बिना जो राखिए, पावै सम्मान न कोय॥
अर्थ: जिस तरह साफ कपड़े की कीमत तभी तक रहती है, जब तक वो गंदा न हो, वैसे ही बिना कर्म किए किसी को सम्मान नहीं मिलता।


3. रविदास जन्म के कारणे, होत न कोऊ नीच।
नर को नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच॥
अर्थ: कोई भी व्यक्ति जन्म से नीच नहीं होता, बल्कि उसके गलत कर्म ही उसे नीच बनाते हैं।


4. मन चंगा तो कठौती में गंगा
अर्थ: अगर आपका मन शुद्ध है, तो आपके लिए हर नदी गंगा है। बाहरी दिखावा किसी काम का नहीं।


5. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय॥
अर्थ: व्यक्ति को हमेशा ऐसी बातें बोलनी चाहिए जिससे स्वयं को आनंद मिले और सुनने वाले के मन को भी ठंडक हो।


6. हरि से संत संत से सब जग, कहि रविदास विचार।
संतों के संग हरि मिले, ज्यों कमल बिनु वारि॥
अर्थ: हमेशा संत की संगत कीजिए, उसे से आपको भगवान की प्राप्ति होगी, संत पानी की तरह होते हैं जो मन के कमल को बिना पानी खिला देते हैं।


7. साधो सहज समाधि भली।
जहाँ न सुरति, न असुरति, न हर्ष न विषाद गली॥
अर्थ: अगर आपके मन में ईश्वर है तो आपको हर स्थिति में खुशी मिलेगी, किसी तरह का दुख आपको छू भी नहीं सकता।


8. मोको कहाँ ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में।
ना तीरथ में, ना मूरत में, ना एकांत निवास में॥
अर्थ: व्यक्ति भगवान को बाहर यानी तीर्थ और मूर्तियों में खोजता है जबकि वे तो हमारे मन के अंदर हैं।


9. कह इथ खलास चमारा, राम भजे सो पार उतारा।
हमरे राम रहीम करीमा, सब संतन के संगी सारा॥
अर्थ: जो भी राम का भजन करता है, वह भवसागर से पार हो जाता है।


9. जाति-पांति पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई॥
अर्थ: भगवान अपने भक्तों में कोई भेद-भाव नहीं करते। जो भी उनका भजन करता है वे उसी के हो जाते हैं।


10. जो भरोसे राम के, ताके काज सवारी।
पथ में कंकर होई, तो भी नंगे पग जाई॥
अर्थ: जो भगवान पर विश्वास करता है, उसके सभी काम बिना किसी रुकावट के पूरे हो जाते हैं। ठीक वैसे ही जैसे रास्ते में भले ही कितने कंकड़ हो लेकिन नंगे पैर होने पर भी उनका भक्तों पर कोई असर नहीं होता।

 

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