
Santan Sante Vrat Kab Hai: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को संतान सप्तमी का व्रत किया जाता है। इस व्रत को संतान सातें, मुक्ताभरण सप्तमी और दुबड़ी सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से संतान पर भगवान शिव-पार्वती की कृपा बनी रहती है। आगे जानिए साल 2026 में संतान सप्तमी कब मनाई जाएगी और इस दिन पूजा कैसे करनी चाहिए…
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल सप्तमी तिथि 17 सितंबर 2026, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होगी और 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 01 मिनट तक रहेगी। संतान सप्तमी की पूजा शाम के समय करने की परंपरा है। 17 सितंबर को शाम के समय सप्तमी तिथि होने के कारण संतान सप्तमी का व्रत 17 सितंबर को ही रखा जाएगा।
- व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- पूजा वाले स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव करके जगह को पवित्र कर लें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- इसके ऊपर भगवान शिव व माता पार्वती की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल पर कलश रखें। कलश पर स्वस्तिक बनाकर उसके ऊपर नारियल रख दें।
- घी का दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा शुरू करें। उन्हें रोली, अक्षत, गुलाल, अबीर, फूल, जनेऊ, पान और सुपारी आदि अर्पित करें।
- पूजा के दौरान भगवान शिव-पार्वती को मीठे पुए और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य प्रसाद का भोग लगाएं। इसके बाद संतान सप्तमी व्रत की कथा सुनें।
- सबसे अंत में भगवान की आरती करें। पूजा के अंत में नीचे दिए मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है-
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
पुत्र-पौत्रादि समृद्धि देहि में परमेश्वरी।।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, संतान सप्तमी का व्रत श्रद्धा और नियम के साथ करने से संतान के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना पूरी होती है।
- संतान सुख की इच्छा रखने वाली महिलाएं भी इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
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