Sawan 2026: शिवजी को बेलपत्र चढ़ाते समय ये 5 नियम नहीं माने तो पूजा अधूरी!

Published : Jul 21, 2026, 11:13 AM IST

Belpatra Puja Vidhi: भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र मुख्य रूप से चढ़ाएं जाते हैं। इन्हें बिल्व पत्र भी कहा जाता है। महादेव को बेल पत्र चढ़ो से जुड़े कुछ खास नियम हैं।

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शिवजी की पूजा करते समय ध्यान रखें ये 5 बातें

Shivling Belpatra Rules: भगवान शिव का प्रिय महीना सावन इस बार 30 जुलाई से शुरू होगा जो 28 अगस्त तक रहेगा। सावन में भक्त महादेव की पूजा में जल, दूध, धतूरा, आक के फूल और बेलपत्र जरूर चढ़ाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है और सावन सोमवार को श्रद्धा से बेलपत्र अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र चढ़ाने से जुड़े कुछ नियम भी बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं वे 5 नियम...


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तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं

भगवान शिव को हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। बेलपत्र की तीन पत्तियों को भगवान शिव के त्रिशूल और त्रिदेव से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए कोशिश करें कि बेलपत्र की तीनों पत्तियां एक साथ जुड़ी हुई हों।

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बेलपत्र साफ और पूरा होना चाहिए

शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए हमेशा साफ और बिना फटा हुआ बेलपत्र चुनें। जिस बेलपत्र में छेद हो या वह बहुत ज्यादा टूटा हुआ हो, उसे चढ़ाने से बचना चाहिए। बेलपत्र चढ़ाने से पहले उसे साफ पानी से धो लेना चाहिए।

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चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र की चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखकर चढ़ानी चाहिए। इसकी डंठल को भी हटा देना शुभ माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाते समय मन में भगवान शिव का ध्यान रखें और श्रद्धा से मंत्र का जाप करें।

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कैसे तोड़े बेलपत्र?

बेलपत्र को कभी भी बिना सोचे-समझे नहीं तोड़ना चाहिए। इसे तोड़ने से पहले भगवान शिव का स्मरण करें और पौधे को प्रणाम करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र तोड़ते समय नाखून का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जरूरत के अनुसार ही बेलपत्र तोड़ें और पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं।

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क्या बेलपत्र का दोबारा उपयोग कर सकते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र को धोकर दोबारा भगवान शिव को चढ़ाया जा सकता है। इसलिए अगर बेलपत्र सूख गया हो तो उसे फेंकने की जरूरत नहीं है। साफ करके श्रद्धा से भगवान शिव को अर्पित किया जा सकता है।


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