Shiv Chalisa Lyrics in Hindi: रामबाण उपाय, महत्व, फायदे, दैनिक पाठ के नियम और महाशिवरात्रि पर पाठ क्यों करें?

Published : Feb 13, 2026, 01:53 PM IST
Shiv Chalisa In Hindi

सार

Shiv chalisa Lyrics: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए वैसे तो अनेक मंत्र, स्तुतियों की रचना की गई है लेकिन इन सभी में शिव चालीसा सबसे ज्यादा प्रचलित है। शिव चालीसा का पाठ करने से जीवन की हर परेशानी दूर हो सकती है।

Shiv Chalisa: इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। ये दिन महादेव की पूजा, उपाय आदि के लिए बहुत ही खास माना जाता है। वैसे तो शिवजी को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय धर्म ग्रंथों में व विद्वानों द्वारा बताए गए हैं। शिव चालीसा का पाठ करना भी इनमें से एक है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर यदि विधि-विधान से शिव चालीसा का पाठ किया जाए तो हर मनोकामना पूरी हो सकती है। आगे सुनें और पढ़ें शिव चालीसा, साथ इससे जुड़ी अन्य खास बातें…

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शिव चालीसा लिरिक्स हिंदी में (Shiv Chalisa Lyrics In Hindi)

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

दोहा

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

शिव चालीसा किसने लिखी है?

शिव चालीसा संत अयोध्यादास ने लिखी है। इस चालीसा में भगवान शिव की महिमा का वर्णन है। शिव चालीसा में कुल 40 चौपाइयां है। शिव चालीसा का नियमित पाठ से महादेव की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।

शिव चालीसा पाठ करने से क्या होता है?

शिव चालीसा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। साथ ही जीवन में चल रही परेशानियां भी अपने आप ही दूर हो जाती हैं। इसका पाठ करने से घर से निगेटिविटी दूर होती है और पॉजिटिविटी बनी रहती है।

क्या शाम को शिव चालीसा पढ़ सकते हैं?

हां, शाम को भी शिव चालीसा पढ़ी जा सकती है। शिव चालीसा का पाठ करने का कोई विशेष समय निश्चित नहीं है। विशेष मौकों जैसे महाशिवरात्रि आदि पर शिव चालीसा का पाठ किया जाए तो इसका और भी अधिक शुभ फल प्राप्त होता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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