Shiv Ji Ki Aarti: ‘ओम शिव ओंकारा’, महाशिवरात्रि पर कैसे करें महादेव की आरती? जानें पूरी विधि

Published : Feb 15, 2026, 06:10 AM IST
Shiv Ji Ki Aarti

सार

Shiv Ji Ki Aarti Lyrics: इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन छोटे-बड़े सभी शिव मंदिरों में महादेव की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। पूजा के अंत में शिवजी की आरती करने का भी विधान है।

Shiv Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: हिंदू धर्म में जब भी किसी देवी-देवता की पूजा की जाती है तो अंत में आरती जरूर की जाती है। बिना आरती के कोई भी पूजा पूरी नहीं होती। इस बार भगवान शिव की भक्ति का पर्व महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन महादेव को प्रसन्न करने के लिए लोग अनेक उपाय, पूजा, दान आदि करेंगे। आरती भी इन उपायों में से एक है। महाशिवरात्रि पर यदि महादेव की विधि-विधान से आरती की जाए तो महादेव जरूर प्रसन्न होते हैं। आगे जानें महाशिवरात्रि पर कैसे करें महादेव की आरती…

कैसे करें महादेव की आरती?

महाशिवरात्रि पर पहले महादेव की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद आरती करें। सबसे पहले शिवलिंग या महादेव के चित्र के चरणों से 4 बार आरती घुमाएं, इसके बाद 2 बार नाभि से, 1 बार चेहरे पर से और 7 बार पूरे शरीर से। इस तरह 14 बार आरती की थाली घूमाने का नियम है। शास्त्रों में आरती की यही उत्तम विधि बताई गई है।

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। (Shiv Ji Ki Aarti Om Jai Shiv Omkara Lyrics in Hindi)

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत, त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी, कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता, जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये, ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥
स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

 

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