
Somvati Amavasya 2026 Shubh Muhurat: इस बार 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। ज्येष्ठ के अधिक मास की अमावस्या होने से इसका महत्व और भी अधिक माना जा रहा है। सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान, जरूरतमंदों को दान, पितृ तर्पण और महादेव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में चल रही परेशानियां दूर हो सकती हैं। आगे जानिए सोमवती अमावस्या की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, और महत्व…
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नदी स्नान के लिए पुण्य काल: सुबह 05 बजकर 28 मिनिट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनिट तक
दान का श्रेष्ठ समय: सुबह 06 बजे से 11 बजकर 30 मिनिट तक
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- 15 जून की सुबह जल्दी उठकर उठकर स्नान करें और इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- इसके बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करें। भगवान शिव का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करें। ऊं नमः शिवाय का जाप करें।
- संभव हो तो पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करें। नहीं तो घर ही कंडे पर घी-गुड़ की धूप देकर पितरों का स्मरण करें।
- पीपल वृक्ष की पूजा करें और उसकी परिक्रमा करें। इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान भी देना चाहिए।
- दिनभर सात्विक व्रत के नियमों का पालन करें जैसे क्रोध व विवाद से बचें। किसी की चुगली न करें, किसी का दिल न दुखाएं।
- अगले दिन यानी 16 जून, मंगलवार की सुबह ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और व्रत का पारण करें। इससे आपकी परेशानियां दूर हो सकती हैं।
विद्वानों के अनुसार 15 जून को सूर्य वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। इसे मिथुन संक्रांति कहा जाएगा। सोमवती अमावस्या पर मिथुन संक्रांति का दुर्लभ संयोग इसके पहले 10 जून 1630 को बना था, यानी 396 साल बाद। इसके बाद ऐसा संयोग 301 साल बाद यानी 20 जून 2327 को देखने को मिलेगा। साथ ही अधिक मास की अमावस्या होने से इसका महत्व और भी अधिक हो गया है।
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