तंत्र-मंत्र के लिए प्रसिद्ध है ये ‘पुराना मंदिर’, कभी देश-विदेश के लोग यहां जादू-टोना सीखने आते थे

Published : May 23, 2024, 03:02 PM IST
Chausath-Yogini-Temple

सार

64 Yogini Temple Morena: हमारे देश में कईं प्राचीन मंदिर हैं। इन सभी की अलग-अलग विशेषताएं हैं। ऐसा ही एक मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में है। इसे तांत्रिकों की यूनिवर्सिटी कहा जाता है। कभी यहां तांत्रिकों का जमावड़ा लगता था। 

Kaha hai 64 Yogini Temple Morena: भारत हजारों सालों से ज्ञान का केंद्र रहा है। कभी विदेश से भी लोग यहां शिक्षा प्राप्त करने आते थे। भारत की नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय के बारे में तो भी जानते हैं लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि कभी भारत में तंत्र-मंत्र का भी विश्वविद्यालय यानी यूनिवर्सिटी हुआ करती थी। आज भी यहां लोग रिसर्च करने आते हैं। आगे जानिए कहां थी तंत्र-मंत्र की यूनिवर्सिटी और इससे जुड़ी खास बातें…

इस मंदिर को कहते हैं तांत्रिकों की यूनिवर्सिटी
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के नजदीक स्थित मितावली में है 64 योगिनी मंदिर। कहते हैं कि कभी यहां दूर-दूर से लोग तंत्र-मंत्र सीखने आते थे। इसलिए इसे तांत्रिक यूनिवर्सिटी कहा जाता है। आज भी इस मंदिर में लोग चोरी-छिपे तंत्र क्रिया करने आते हैं। ये मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है।

9वीं सदी में का है ये मंदिर
कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण 9वीं सदी में प्रतिहार वंश के राजाओं ने करवाया था। इस मंदिर में 101 खंबे और 64 कमरे बने हुए हैं। कभी इस मंदिर के हर कमरे में शिवलिंग और योगिनी की प्रतिमा हुआ करती थी है। योगिनी यानी तंत्र-मंत्र की देवियां। बाद में इन मूर्तियों को यहां से निकलकर म्यूजियम में रख दिया गया। मंदिर के मुख्य परिसर में आज भी एक बड़ा शिवलिंग स्थापित है।

तंत्र कवच से सुरक्षित है ये स्थान
लोगों को कहना है कि ये मंदिर आज भी तंत्र साधना के कवच से ढका हुआ है यानी सुरक्षित है ताकि यहां की पराशक्तियां बाहर निकलकर लोगों को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाए। यही वजह है रात होते ही इस मंदिर में सन्नाटा पसर जाता है और यहां रुकने की हिम्मत कोई नहीं करता।

बलुआ पत्थरों से बना ये मंदिर
64 योगिनी का ये मंदिर लगभग 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। इसका निर्माण लाल-भूरे बलुआ पत्थरों से किया गया है। ये भी कहते हैं कि दिल्ली में स्थित पुराना संसद भवन इसी मंदिर की डिजाइन को ध्यान में रखकर बनाया गया था। कुछ लोग इसे चंबल की संसद की उपमा भी देते हैं।


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