Ashadha Gupt Navratri 2025: कौन-सी हैं 10 महाविद्याएं?

Published : Jun 25, 2025, 03:22 PM IST
gupt navratri 2025

सार

Ashadha Gupt Navratri 2025: इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 26 जून से शुरू हो रही है। गुप्त नवरात्रि में सिद्धि प्राप्त करने के लिए 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इन महाविद्याओं के बारे में कम ही लोग जानते हैं। 

Ashadha Gupt Navratri 2025 Date: धर्म ग्रंथों के अनुसार, एक साल में 4 नवरात्रि मनाई जाती है, इनमें से 2 प्रकट और 2 गुप्त नवरात्रि होती है। आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि मनाने की परंपरा है। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 26 जून से 4 जुलाई तक मनाई जाएगी। इस नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा कर सिद्धियां प्राप्त की जाती हैं। इन 10 महाविद्याएं कौन सी हैं और इनका प्राकट्य कैसे हुआ, इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आगे जानिए इन 10 महाविद्याओं के बारे में…

कैसे प्रकट हुई 10 महाविद्या?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। एक बार दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया लेकिन उसमें अपने पुत्री और जमाई को निमंत्रण नहीं दिया। जब ये बात सती को पता चली शिवजी के मना करने के बाद भी वे यज्ञ में जाने की जिद करने लगी। बार-बार शिवजी के मना करने पर देवी सती क्रोधित हो गईं। दसों दिशाओं से माता सती के दस अलग-अलग रूप प्रकट हो गए। इन दस स्वरूपों को ही दस महाविद्या कहा जाता है। आगे जानिए कौन-सी हैं ये 10 महाविद्या…

1. काली: दस महाविद्याओं में पहली है काली। ये देवी का रौद्र रूप है। इनकी पूजा से हर तरह के संकट दूर हो जाते हैं और भय का नाश होता है।

2. तारा: दस महाविद्याओं में दूसरे स्थान पर है तारा। ये सभी दुखों से तारने वाली हैं, इसलिए इनका ये नाम है। इन्हें नीलसरस्वती के नाम से भी जाना जाता है। इनकी पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

3. षोडशी: इनकी चार भुजाएं व तीन नेत्र हैं। इनका आसन कमल है। देवी षोडशी को श्री विद्या, ललिता, राज-राजेश्वरी, महात्रिपुरसुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। इनकी पूजा से गरीब भी राजा की तरह समृद्धशाली बन सकता है।

4. भुवनेश्वरी: मां भुवनेश्वरी की पूजा पुत्र-प्राप्ति के लिए की जाती है। इनकी एक हजार आंखे हैं, इसलिए इन्हें शताक्षी का कहा जाता है। इनकी कृपा से ही धरती पर वनस्पति उत्पन्न हुई, जिसके चलते इनका एक नाम शाकम्भरी भी प्रसिद्ध है।

5. छिन्नमस्ता: देवी के इस रूप का मस्तक कटा हुआ है, जिसमें से रक्त की तीन धाराएं निकल रही हैं। ऐसा कहा जाता है कि देवी छिन्नमस्ता की पूजा से हर तरह की सिद्धि पाई जा सकती है।

7. धूमावती: देवी का ये रूप विधवा स्त्री के समान है। इन्हें अलक्ष्मी भी कहते हैं। सुहागिन महिलाएं इनकी पूजा नहीं करतीं। देवी धूमावती की पूजा विपत्ति नाश, रोग निवारण, युद्ध में विजय के लिए की जाती है।

8. बगलामुखी: देवी बगलामुखी की पूजा तंत्र से की जाती है। इनकी पूजा में हल्दी की माला, पीले फूल व पीले कपड़ों का विधान हैं। इनकी पूजा में बहुत सावधानी की जरूरत होती है।

9. मातंगी: देवी का ये रूप असुरों को मोहित करने वाला और भक्तों को अभीष्ट फल देने वाला है। गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने के लिए देवी मातंगी की पूजा शुभ मानी गई है।

10. कमला: देवी कमला की पूजा से सौभाग्य के द्वार खुल जाता है। कमला को लक्ष्मी भी कहते हैं। जो व्यक्ति इनकी पूजा करता है, उसे अपने जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। इनकी पूजा के लिए गुरु दीक्षा बहुत जरूरी है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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