Unique Temple: भाई-बहन के साथ यहां आए थे यमराज, भाई दूज पर इस मंदिर में उमड़ती हैं भीड़

Published : Oct 23, 2025, 03:22 PM IST
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सार

Bhai Dooj 2025: मध्य प्रदेश में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां भाई दूज पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ये मंदिर भगवान यमराज, शनिदेव और इनकी बहन युमना व ताप्ती को समर्पित है। इस मंदिर से जुड़ी अनेक मान्यताएं भी हैं।

Bhai Bahan Mandir Baitul: इस बार भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उसकी खुशहाली की कामना करती हैं। मध्य प्रदेश में एक मंदिर ऐसा भी है जहां भाई दूज पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि भाई दूज पर इस मंदिर में दर्शन करने से यम यातना से मुक्ति मिलती है। ये मंदिर भगवान यमराज, शनिदेव और इनकी बहनों यमुना और ताप्ति को समर्पित है। इसे भाई-बहन का मंदिर भी कहते हैं। आगे जानिए क्यों खास है ये मंदिर और इसकी मान्यता के बारे में…

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मध्य प्रदेश में कहां है भाई-बहन का मंदिर?

मध्य प्रदेश के बैतूल में ताप्ती नदी के किनारे भाई-बहन का ये प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। मान्यता है कि प्राचीन समय में स्वयं यमराज अपने भाई शनिदेव और बहन यमुना व ताप्ती के साथ यहां आए थे। बहन ताप्ती इसी स्थान पर नदी बनकर बहने लगी। जिससे ये स्थान और भी पवित्र हो गया। बाद में यमराज और शनिदेव अपनी बहन से मिलने यहां आने लगे। जिससे ये स्थान भाई-बहन के लिए पवित्र हो गया। इसी किवदंति के चलते लोगों ने यहां एक मंदिर बना दिया और यमराज, शनिदेव, यमुना और ताप्ती की प्रतिमाएं स्थापित कर दीं। तभी से लोग इसे भाई-बहन के मंदिर के नाम से जानते हैं।

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यहां दर्शन से मिलती है यम यातना से मुक्ति

ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में भाई दूज के मौके पर यमराज, शनिदेव, यमुना और ताप्ती के दर्शन कर लेते है, उसे यम यातना से मुक्ति मिल जाती है यानी वह मृत्यु के बाद नरक में दी जाने वाली यातनाओं से मुक्त होकर सीधे स्वर्ग को चले जाता है। इसी मान्यता के चलते भाई दूज के मौके पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं।

सूर्यदेव का मंदिर भी हैं यहां

यमराज, शनिदेव, यमुना और ताप्ती, ये चारों भगवान सूर्य की संतान है। इसलिए भाई-बहन के इस अनोखे मंदिर के ऊपरी तल पर सूर्यदेव की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। सूर्यदेव की प्रतिमा के आस-पास उनकी दोनों पत्नी संध्या और छाया की प्रतिमाएं भी हैं। लोग इनके दर्शन करके भी पुण्य फल प्राप्त करते हैं। इस तरह सूर्यदेव का पूरा परिवार ही इस मंदिर में समाहित है।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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