Chhath Puja 2025: जानिए डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे का रहस्यमय कारण

Published : Oct 23, 2025, 10:09 PM IST

छठ पूजा 2025 के दौरान, भक्त डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है? यह जीवन के उतार-चढ़ाव, नई शुरुआत और सूर्य की दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है। 

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नहाय-खाय से शुरू होता छठ महापर्व

लोक आस्था के महापर्व छठ की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यह पर्व छठी मैया और भगवान सूर्य को समर्पित है। यह साल में दो बार चैत्र और कार्तिक माह में मनाया जाता है। छठ पूजा का व्रत सुखी जीवन और संतान की लंबी आयु की कामना के लिए किया जाता है। यह महापर्व चार दिनों तक चलता है। इस महापर्व से कई परंपराएं, नियम और महत्व जुड़े हुए हैं। छठ पूजा का महापर्व नहाय-खाय से शुरू होता है और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है। हालांकि, छठ पर्व के दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है? आइए जानें…

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छठ पूजा कब शुरू होती है?

इस वर्ष, छठ पूजा 25 अक्टूबर से शुरू हो रही है। यह पर्व 28 अक्टूबर को समाप्त होगा। 25 अक्टूबर को पहले दिन नहाय-खाय होगा। दूसरे दिन, 26 अक्टूबर को खरना मनाया जाएगा। तीसरे दिन, 27 अक्टूबर को शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। चौथे दिन, 28 अक्टूबर को सुबह उगते सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाएगा। इसके साथ ही छठ पूजा का समापन होगा।

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अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने का अर्थ

जिस प्रकार सूर्य अस्त होता है और फिर उदय होता है, उसी प्रकार जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। इसीलिए डूबते सूर्य को अर्घ्य देना अंत और नई शुरुआत दोनों का प्रतीक माना जाता है। यह भी माना जाता है कि छठ पर्व के दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने से उसकी रोशनी के कारण त्वचा रोगों से बचाव होता है। इससे कई समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है। जिस प्रकार सूर्य प्रतिदिन अस्त होने के बाद पुनः उदय होता है, उसी प्रकार जीवन में सुख और दुःख स्थिर नहीं रहते। सुख और दुःख आते-जाते रहते हैं।

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छठ महापर्व के दौरान डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व

छठ एकमात्र ऐसा प्रमुख पर्व है जिसमें डूबते सूर्य को प्रणाम किया जाता है और फिर अर्घ्य दिया जाता है। किसी अन्य हिंदू पर्व में डूबते सूर्य की पूजा नहीं की जाती। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शाम के समय भगवान सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं, जो सूर्य की अंतिम किरण होती है। संध्याकालीन पूजा में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है।

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छठ महापर्व में उगते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व

उगते सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही छठ महापर्व का समापन होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रातः सूर्योदय के समय सूर्य देव अपनी पत्नी उषा के साथ होते हैं, जो सूर्य की पहली किरण होती है। छठ पूजा में उगते सूर्य को अर्घ्य देने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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