कहां है 700 साल पुराना शनि मंदिर, जहां 2 पत्नियों के साथ होती है उनकी पूजा?

Published : Mar 21, 2025, 06:37 PM IST
Akshayapureeswarar-Temple

सार

Famous Shani Temple Tamil Nadu: हमारे देश में शनिदेव के अनेक मंदिर हैं, लेकिन इनमें से तमिलनाडु का अक्षयपुरीश्वर मंदिर बहुत ही खास है। ये मंदिर 700 साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर से जुड़ी कईं मान्यताए हैं जो इसे और खास बनाती हैं। 

Interesting Facts of Akshayapurishwar Shani Temple: 29 मार्च, शनिवार को शनि कुंभ से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेगा। शनि का राशि परिवर्तन बहुत ही खास ज्योतिषीय घटना है क्योंकि शनि ढाई साल में एक बार राशि बदलता है। हमारे देश में शनिदेव के अनेक मंदिर हैं, लेकिन इनमें से तमिलनाडु में स्थित अक्षयपुरीश्वर मंदिर बहुत खास है। इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर से शनिदेव से जुड़ी कई मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जो इसे और भी खास बनाती हैं। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी रोचक बातें…

यहां पत्नियों के साथ होती है शनिदेव की पूजा

शनिदेव का अक्षयपुरीश्वर मंदिर तमिलनाडु के तंजावूर जिले के विलनकुलम नामक स्थान पर है। शायद ये दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर हैं शनिदेव की पूजा उनकी पत्नियों के साथ की जाती है। शनिदेव की 2 पत्नियां हैं, जिनके नाम मंदा और ज्येष्ठा हैं। साढ़ेसाती और ढय्या से परेशान लोग यहां विशेष रूप से दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से इनकी समस्या कम हो जाती हैं।

700 साल पुराना है ये मंदिर

शनिदेव का ये मंदिर काफी पुराना है। आस-पास के शिलालेखों से पता चलता है कि इसका मंदिर सन 1335 के आस-पास में हुआ था। इस हिसाब से देखा जाए तो ये मंदिर लगभग 700 साल पुराना है। इतिहासकारों के मुताबिक, इस शनि मंदिर को चोल राजा पराक्र पंड्यान ने बनवाया था। मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां सूर्य का प्रकाश भी ठीक से नहीं पहुंच पाता।

यहां गिरकर घायल हुए थे शनिदेव

शनिदेव से इस मंदिर से एक कथा भी जुड़ी है। उसके अनुसार तमिल में विलम का अर्थ है बिल्व और कुलम का अर्थ है झूंड। यानी यहां पहले बिल्ववृक्षों का जंगल था। इन्हीं पेड़ों की जड़ों में उलझकर शनिदेव यहां गिरकर घायल हो गए थे। तब शनिदेव ने यहां तपस्या कर शिवजी प्रसन्न किया। महादेव ने प्रकट होकर शनिदेव को पैर ठीक होने और विवाह का वरदान दिया था।


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इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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