Festival Calendar June 2025: जून में कब, कौन-सा व्रत-त्योहार? यहां देखें पूरी लिस्ट

Published : May 27, 2025, 11:04 AM IST
June 2025 festival calendar

सार

June 2025 Festival calendar: साल 2025 के छठे महीने जून में कईं महत्वपूर्ण व्रत त्योहार मनाएं जाएंगे। इन त्योहारों में महेश नवमी, गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी आदि प्रमुख हैं। देखें जून 2025 का फेस्टिवल कैलेंडर। 

June 2025 Hindu Festival List: अंग्रेजी कैलेंडर का छठा महीना जून 2025 धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही खास रहेगा क्योंकि इस महीने में कईं महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे। 11 जून तक हिंदू पंचांग का ज्येष्ठ मास रहेगा, इसके बाद 12 से 30 जून तक आषाढ़ मास रहेगा। हिंदू पंचांग के ये दोनों महीने बहुत खास माने गए हैं। आगे जानिए जून 2025 में कब, कौन-सा त्योहार मनाया जाएगा…

जून 2025 के व्रत-त्योहार (Fasts and festivals of June 2025)

3 जून, मंगलवार- धूमावती जयंती
4 जून, बुधवार- महेश नवमी
5 जून, गुरुवार- गायत्री जयंती, गंगा दशहरा
6 जून, शुक्रवार- निर्जला एकादशी
7 जून, रविवार- प्रदोष व्रत, दक्षिण वट सावित्री व्रत प्रारंभ
9 जून, सोमवार- महा महादेव पूजन
10 जून, मंगलवार- बड़ा मंगल, दक्षिण व्रत पूर्णिमा व्रत
11 जून, बुधवार- संत कबीर जयंती, स्नान-दान पूर्णिमा
14 जून, शनिवार- गणेश चतुर्थी व्रत
19 जून, गुरुवार- शीतलाष्टमी, बसोरा
21 जून, शनिवार- योगिनी एकादशी
23 जून, सोमवार- शिव चतुर्दशी व्रत, प्रदोष व्रत
25 जून, बुधवार- हलहारिणी अमावस, स्नान-दान अमावस
26 जून, गुरुवार- गुप्त नवरात्रि आरंभ
27 जून, शुक्रवार- जगन्नाथ रथयात्रा आरंभ
28 जून, शनिवार- विनायकी चतुर्थी व्रत

26 जून से शुरू होगी गुप्त नवरात्रि

धर्म ग्रंथों के अनुसार, साल में 4 नवरात्र मनाई जाती है, इनमें से 2 प्रकट और 2 गुप्त नवरात्रि होती है। आषाढ़ मास में भी गुप्त नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इस बार गुप्त नवरात्रि 26 जून से शुरू होगी, जो 4 जुलाई तक मनाई जाएगी। इस नवरात्रि में तामसिक शक्तियों का पूजा की जाती है, जिससे गुप्त सिद्धियां प्राप्त हो सके।

27 जून से शुरू होगी जगन्नाथ रथयात्रा

उड़ीसा के पुरी में हर साल निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथयात्रा 27 जून से शुरू होगी। इस रथयात्रा के देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी भक्त यहां आते हैं। इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर जाते हैं और कुछ दिन वहीं आराम करते हैं। 8 दिनों के बाद भगवान पुन: अपने रथ पर सवार होकर जगन्नाथ मंदिर में आ जाते हैं। इस दौरान अनेक रोचक परंपराओं का पालन किया जाता है।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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