Hindu Tradition: विवाह में वर-वधू 7 फेरे ही क्यों लेते हैं, इससे कम या ज्यादा क्यों नहीं?

Published : Apr 18, 2025, 10:03 AM ISTUpdated : Apr 18, 2025, 10:46 AM IST
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सार

Hindu Tradition: हिंदू धर्म में 16 प्रमुख संस्कार माने गए हैं। विवाह भी इनमें से एक है। विवाह के दौरान वर-वधू अग्नि के 7 फेरे लेते हैं। बहुत कम लोगों को पता है वर-वधू 7 ही फेरे क्यों लेते हैं, इससे कम या ज्यादा क्यों नहीं? 

Hindu Tradition: हिंदू धर्म में विवाह एक आवश्यक संस्कार माना गया है। विवाह के दौरान अनेक परंपराओं का पालन भी किया जाता है। विवाह की इन परंपराओं के पीछे धार्मिक, मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक तथ्य छिपे होते हैं। विवाह संस्कार के दौरान वर-वधू अग्नि के सात फेरे लेते हैं। इसके बाद ही वधू अपने पति की बाईं तरफ आकर बैठती है यानी उसकी अर्धांगिनी बनती है। ये बात बहुत कम लोगों को पता है कि विवाह के दौरान 7 फेरे ही क्यों लिए जाते हैं, इससे कम या ज्यादा क्यो नहीं? आगे जानिए क्या है इसके पीछे का मनोवैज्ञानिक कारण…

विवाह में 7 ही फेरे क्यों?

विवाह के दौरान लेने वाले 7 फेरों के पीछे अंक गणित का विशेष महत्व है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, हिंदू धर्म में अंक 7 को बहुत ही पवित्र माना गया है, इसके पीछे का कारण है कि ये अंक अविभाज्य है यानी किसी भी अन्य अंक से 7 को विभाजित नहीं किया जा सकता है। हिंदू धर्म में विवाह के बंधन को भी अविभाज्य माना गया है यानी एक बार विवाह होने के बाद उसके टूटने की संभावना नहीं है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारे ऋषि मनियों ने विवाह में 7 फेरे और 7 वचन की परंपरा शुरू की।

7 अंक क्यों है इसका खास

ज्योतिषाचार्य पं. द्विवेदी के अनुसार, हिंदू धर्म में 7 अंक को लेकर बहुत सारी चीजें हैं जैसे 7 सागर, सप्त ऋषि, 7 दिन, संगीत के 7 सुर, इंद्रधनुष के 7 रंग, सूर्य के 7 घोड़े, सप्त धातु, 7 द्वीप आदि। दरअसल 7 अपने आप में एक पूर्ण अंक है, इसलिए अंक शास्त्र के साथ-साथ हिंदू धर्म में भी इसका विशेष महत्व माना गया है। अंक 7 के स्वामी केतु हैं जो शुभ होने की स्थिति में जीवन में स्थिरता प्रदान करते हैं।

शादी के 7 वचन भी जरूरी

विवाह के दौरान पहले 7 फेरे लिए जाते हैं इसके बाद वर-वधू एक-दूसरे को 7 वचन भी देते हैं। यही 7 वचन आने वाले वैवाहिक जीवन की नींव माने जाते हैं। इन 7 वचनों में पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति अपना सर्वस्व समर्पण करने और एक नई गृहस्थी शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। 7 फेरों और 7 वचन के बाद ही विवाह संपूर्ण माना जाता है।


ये हैं विवाह के 7 वचन

पहला वचन
तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!
अर्थ - इस वचन में कन्या वर से कहती है ‘आप जब भी कोई धार्मिक काम करें या तीर्थयात्रा पर जाएं तो मुझे भी साथ लेकर जाएं। यदि आप ये वचन स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।’

दूसरा वचन
पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!
अर्थ - कन्या वर से कहती है ‘आप अपने माता-पिता की तरह मेरे माता-पिता का भी सम्मान करेंगे और परिवार का पालन करेंगे तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।’

तीसरा वचन
जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात
वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृतीयं !!
अर्थ - कन्या कहती है ‘यदि आप पूरे जीवन भर मेरा पालन करना स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।’

चौथा वचन
कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!
अर्थ - चौथे वचन में कन्या कहती है ‘ विवाह बंधन में बंधने के बाद परिवार की सभी जिम्मेदारियां आपके कंधों पर रहेगी। अगर आप इसे स्वीकार करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।’

पांचवां वचन
स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!
अर्थ- इस वचन में कन्या कहती है ‘घर के काम लेन-देन आदि में खर्च करते समय आप मेरी राय लेना स्वीकार करें तो मैं आपके वामांग में आती हूं।’

छठां वचन
न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!
अर्थ - कन्या वर से कहती है ‘ आप सबके सामने कभी मेरा अपमान नहीं करेंगे और हर तरह की बुराइयों से दूर रहेंगे तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।’

सातवां वचन
परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!
अर्थ - अंतिम वचन में कन्या कहती है ‘आप पराई स्त्रियों को मां समान समझेंगे और हमारे बीच अन्य किसी को नहीं आने देंगे। यह वचन दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।’

Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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