इंदिरा एकादशी और पितृ श्राद्ध का अनोखा संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Published : Sep 15, 2025, 01:21 PM IST
इंदिरा एकादशी और श्राद्ध

सार

इंदिरा एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को 17 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पापों और रोगों से मुक्ति मिलती है। इसी दिन एकादशी श्राद्ध भी होगा, जिसमें पितरों को तर्पण और जल अर्पित किया जाता है।

Indira Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर का दिन बेहद खास माना जा रहा है। दरअसल, इस दिन इंदिरा एकादशी और एकादशी श्राद्ध एक साथ पड़ने वाले हैं। हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो श्री हरि और माता लक्ष्मी के निमित्त रखा जाता है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति पापों और रोगों से मुक्त हो जाता है।

वैसे, इसी दिन एकादशी श्राद्ध यानी ग्यारस श्राद्ध भी किया जाएगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, एकादशी श्राद्ध के दिन उन लोगों के लिए तर्पण या पिंडदान किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन हुई हो। ऐसी मान्यता है कि जिन मृतकों का श्राद्ध इस दिन किया जाता है, उन्हें स्वयं श्री हरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तो आइए अब जानते हैं कि इंदिरा एकादशी पर किस मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा की जाएगी और किस मुहूर्त में पितरों का श्राद्ध किया जाएगा।

इंदिरा एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त

  • आश्विन मास की एकादशी तिथि 17 सितंबर को मध्यरात्रि 12:21 बजे प्रारंभ होगी और तिथि का समापन भी 17 सितंबर को ही रात्रि 11:39 बजे होगा। इसके साथ ही इस दिन परिघ योग, शिव योग और शिववास का संयोग भी है। जिसके कारण इस दिन कभी भी श्री हरि की पूजा की जा सकती है।
  • व्रत पारण मुहूर्त- इंदिरा एकादशी पारण 18 सितंबर को सुबह 6:07 बजे से 8:34 बजे तक होगा।

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एकादशी श्राद्ध पर पितरों को जल अर्पित करने का समय

  • एकादशी श्राद्ध पर पितरों को जल अर्पित करने के लिए तीन मुहूर्त होंगे - कुटुप मुहूर्त, रौहिं मुहूर्त और मध्याह्न काल।
  • कुटुप मुहूर्त - सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
  • रौहिं मुहूर्त - दोपहर 12:40 बजे से दोपहर 1:29 बजे तक
  • दोपहर का समय - इस दिन दोपहर 1:29 बजे से दोपहर 3:56 बजे तक

इंदिरा एकादशी पूजन विधि

इस दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद सबसे पहले भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें, जिनकी पूजा शालिग्राम रूप में की जाती है। भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, पंचामृत और तुलसी के पत्ते अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जाप करें।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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