Mahabharat Facts: महाभारत का ऐसा योद्धा जिसे हराने में भीम के भी छूट गए पसीने, श्रीकृष्ण को छोड़ना पड़ा मथुरा

Published : Jun 04, 2025, 04:22 PM ISTUpdated : Jun 06, 2025, 09:11 AM IST
Jarasandha story

सार

mahabharat interesting facts: महाभारत में एक से बढ़कर एक महाबली योद्धाओं का वर्णन मिलता है। ऐसा ही एक योद्धा था जरासंध, जिसे हराने में भीम के भी पसीने छूट गए, यहां तक कि श्रीकृष्ण को भी मथुरा छोड़कर जाना पड़ा।

Interesting facts about Jarasandha of Mahabharata: महाभारत की कथा जितनी रोचक है, उतनी ही रहस्ययमी भी है। इसमें ऐसे-ऐसे महाबली योद्धाओं का वर्णन है जिनके बल की कोई सीमा नहीं थी। ऐसा ही एक योद्धा था मगध देश का राजा जरासंध। कुश्ती में जरासंध ने भीम के भी पसीने छुड़ा दिए थे और लगातार 13 दिनों तक युद्ध किया था। इतना ही नहीं खुद श्रीकृष्ण को जरासंध के कारण मथुरा छोड़कर द्वारिका में जाकर बसना पड़ा था। आगे जानें जरासंध से जुड़ी अनसुनी और रोचक बातें…

कैसे हुआ जरासंध का जन्म?

महाभारत के अनुसार, मगधदेश के राजा बृहद्रथ की दो पत्नियां थीं, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। एक महात्मा ने राजा बृहद्रथ को एक फल देकर रानी को खिलाने को कहा। राजा ने अपनी दोनों पत्नियों को वह फल आधा-आधा काटकर दे दिया, जिससे उन दोनों ने आधे-आधे शरीर पर वाली पुत्र का जन्म दिया। दोनों रानियों ने शिशु के उन टुकड़ों को वन में फेंक दिया। वन में जरा नाम की राक्षसी ने उन टुकड़ों को जैसे ही आपस में जोड़ा, वह शिशु जीवित हो गया और रोने लगा। राजा और दोनों रानियां ने जब बालक के रोने की आवाज सुनी तो वहां पहुंचे। राक्षसी से उन्हें पूरी बात सच-सच बता दी। जरा नाम की राक्षसी द्वारा जोड़े जाने से राजा ने उसका नाम जरासंध रख दिया।

श्रीकृष्ण को क्यों छोड़नी पड़ी मथुरा?

जरासंध मथुरा के राजा कंस का ससुर था। जब श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया तो जरासंध उन्हें अपना सबसे बड़ा शत्रु मानने लगा। श्रीकृष्ण को मारने के लिए वह बार-बार मथुरा पर हमला करता। इस युद्ध में जरासंध को पराजय मिलती लेकिन मथुरा नगरी का बहुत नुकसान होता। इस स्थिति से बचने के लिए श्रीकृष्ण ने मथुरा छोड़कर द्वारिका नाम का दूसरा शहर बसाया और परिवार सहित वहां जाकर रहने लगे।

भीम के साथ जरासंध ने कितने दिनों तक कुश्ती लड़ी?

जब युधिष्ठिर को इंद्रप्रस्थ का राज्य मिला तो उन्होंने राजसूय यज्ञ करने का विचार किया, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि जरासंध के रहते ये यज्ञ पूरा नहीं हो सकता। तब श्रीकृष्ण अर्जुन और भीम के साथ ब्राह्मण के रूप में जरासंध से मिलने पहुंचे। भीम ने जरासंध को मल्ल युद्ध यानी कुश्ती के लिए ललकारा। भीम में 100 हाथियों के जितना बल था लेकिन इसके बाद भी जरासंध उनके साथ 13 दिनों तक कुश्ती करता रहा। 14 दिन श्रीकृष्ण के इशारे पर भीम ने जरांसध के शरीर के दो टुकड़े कर उन्हें विपरीत दिशा में फेंक दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

जरासंध क्यों देना चाहता था 100 राजाओं की बलि?

जरासंध चक्रवर्ती सम्राट बनना चाहता था, इसके लिए वह 100 राजाओं की बलि देना चाहता था। उसने अनेक राजाओं को बंदी भी बना लिया था। लेकिन उन राजाओं की बलि देने से पहले ही श्रीकृष्ण ने भीम के द्वारा जरासंध का वध करवा दिया। श्रीकृष्ण ने उन सभी राजाओं को जरासंध की कैद से मुक्त कर दिया। जरासंध के बेटे सहदेव ने श्रीकृष्ण की शरण में आना स्वीकार किया, जिससे वह जीवित बच गया।

Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महाभारत ग्रंथ पर आधारित है। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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