एक रात के लिए दुल्हन बनते हैं किन्नर, जानें किससे करते हैं शादी?

Published : Jan 28, 2025, 10:37 AM IST
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सार

Maha Kumbh 2025: महाकुंभ 2025 में सबसे ज्यादा चर्चा किन्नर अखाड़े की है। किन्नर अखाड़ा वर्तमान में जूना अखाड़ा के अधीन है तो उसी के साथ अमृत स्नान कर रहा है। किन्नरों की अपनी अलग परंपरा है। 

The tradition of Kinnar's marriage: प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 में किन्नर अखाड़ा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। किन्नर से अपनी कुछ अलग परंपराएं हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि किन्नरों की शादी भी होती है। ये एक रात के लिए दुल्हन बनते हैं और अगली सुबह फिर से विधवा हो जाते हैं। किन्नरों की शादी की परंपरा तमिलनाडु के एक गांव में होती है। आगे जानिए क्या है किन्नरों की ये परंपरा…

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कहां होती है किन्नरों की शादी?

तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के कुनागम गांव में हर साल किन्नरों का विवाह होता। इसमें शामिल होने के लिए देश भर के हजारों किन्नर यहां इकट्ठा होते हैं। ये विवाह समारोह एक या दो नहीं बल्कि पूरे 17 दिन चलता है। समारोह की 17वीं रात सभी किन्नर अरावन देव के नाम का मंगलसूत्र पहनाते हैं। इस तरह वे स्वयं को विवाहित मानते हैं।

अगले ही दिन हो जाते हैं विधवा

समारोह के 18वें दिन अरावन देव की प्रतिमा को सिंहासन पर बैठाकर किन्नर जुलूस निकालते हैं। इसके बाद पूजा करवाने वाला पंडित सांकेतिक रूप से अरावन देव का मस्तक काट देता है और इसी के साथ सभी किन्नर विधवा हो जाती हैं। विधान होते ही किन्नर अपनी चूड़ियां तोड़ देते हैं और सफेद साड़ी पहन लेते हैं। इस तरह किन्नर सिर्फ एक रात के लिए ही दुल्हन बनते हैं।

कौन हैं अरावन देव?

महाभारत के अनुसार पांडु पुत्र अर्जुन को नागकन्या उलूपी से जो संतान हुई, उनका नाम अरावन था। युद्ध शुरू होने से पहले जब पांडवों ने मां काली की पूजा की तो उसमें बलि देने के लिए एक राजकुमार की आवश्यकता पड़ी। तब अरावन ने अपनी बलि देना स्वीकार किया। लेकिन कुंवारे राजकुमार की बलि नहीं दी जा सकती थी। इस स्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने मोहिनी रूप धारण कर अरावन से विवाह किया। अगले दिन अरावन ने अपना अपना मस्तक काटकर देवी को चढ़ा दिया। ऐसा होने से मोहिनी रूपी श्रीकृष्ण विधवा बनकर रोने लगे। किन्नरों में मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने पुरुष होकर भी औरत बनकर अरावन से विवाह किया। किन्नर में भी स्त्री-पुरुष दोनों के ही गुण होते हैं, इसलिए वे अरावन को अपना पति मानकर उनसे शादी करते हैं।


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