नागपंचमी पर उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में 8 लाख से ज्यादा भक्तों ने किए दर्शन

Published : Jul 29, 2025, 09:37 AM ISTUpdated : Jul 30, 2025, 08:39 AM IST
NagchandreshwaTemple-Ujjain

सार

Nag Panchami 2025: उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर ही 24 घंटे के लिए खुलता है। इस दौरान यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इस बार यहां 8 लाख भक्तों ने दर्शन किए।

Nagchandreshwar Temple Ujjain: हमारे देश में अनेक प्रसिद्ध नाग मंदिर हैं। इन्हीं में से एक है उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर। ये मंदिर साल में सिर्फ एक दिन के लिए नाग पंचमी पर ही खुलता है। इस बार 29 जुलाई को नागपंचमी पर्व भी ये मंदिर भक्तों के दर्शन के लिए खोला गया। सोमवार रात से ही यहां भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। नागचंद्रेश्वर मंदिर मंगलवार रात 12 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहा। 
 

महाकाल गर्भगृह के ऊपर है नागचंद्रेश्वर मंदिर

साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी पर खुलने वाला नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकाल गर्भगृह के ऊपरी तल पर स्थित है। दरअसल महाकाल मंदिर तीन तलों पर बना हुआ है। सबसे नीचे महाकाल ज्योतिर्लिंग स्थित है। इसके ऊपर ओमकारेश्वर है और सबसे ऊपर नागचंद्रेश्वर स्थित है। हर साल नागचंद्रेश्वर मंदिर सिर्फ नाग पंचमी के मौके पर ही 24 घंटे के लिए खोला जाता है।

8 लाख से अधिक भक्तों ने किए दर्शन 

28 जुलाई, सोमवार की रात 12 बजे नाग पंचमी पर्व शुरू होते ही नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खोले गए। सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत विनीत गिरी महाराज ने पूजन किया। एक अनुमान के मुताबिक नागपंचमी पर लगभग 8 लाख 66 हजार से अधिक भक्तों ने यहां दर्शन किए। नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए 2 किमी लंबी लाइन लगी रही। रिमझिम और भारी बारिश के बीच भी भक्तों घंटों लाइन में खड़े रहे।

दोपहर 12 बजे हुआ त्रिकाल पूजन

मंगलवार दोपहर 12 बजे महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से विशेष त्रिकाल पूजन किया गया। शाम का पूजन पुजारियों और पुरोहितों द्वारा किया गया। रात 12 बजे मंदिर के पट अगले साल तक के लिए बंद कर दिए गए। भक्तों की संख्या को देखते हुए पुलिस विभाग के 200 वरिष्ठ अधिकारी और 1800 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे,  साथ ही 560 कैमरों से स्थिति पर नजर रखी गई।

क्यों खास है नागचंद्रेश्वर प्रतिमा?

भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा बहुत ही अद्भुत है। इस प्रतिमा में भगवान शिव देवी पार्वती के साथ शेषनाग पर विराजित हैं। ये प्रतिमा नेपाल से सिंधिया राजवंश द्वारा यहां स्थापित की गई थी। एक मान्यता ये भी है कि इसी स्थान पर कर्कोटक नाग ने तपस्या की थी। महादेव ने उसे यहीं रहने का वरदान दिया था। तब से उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ही कर्कोटक नाग गुप्त रूप से निवास करता है।

 

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