Pitru Paksha 2025: क्या बच्चों का होता है श्राद्ध? शास्त्रों में छिपे पितृ पक्ष 2025 के बड़े रहस्य

Published : Sep 14, 2025, 11:08 PM IST
Pitru Paksha 2025

सार

Pitru Paksha 2025: शास्त्रों के अनुसार, गर्भस्थ शिशु और 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों का श्राद्ध नहीं किया जाता है, उनके लिए केवल मलिन षोडशी और तर्पण किया जाता है। 6 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि या त्रयोदशी को किया जाता है।

Pitru Paksha 2025: पितृ पक्ष 7 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू हो चुका है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज धरती पर आते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं। कहा जाता है कि इस दौरान श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और पितृ दोष दूर होता है। बुजुर्गों के श्राद्ध के नियम तो लोग जानते हैं, लेकिन कई बार यह सवाल उठता है कि क्या गर्भ में ही मर गए बच्चों का श्राद्ध किया जाता है?  उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानिए जन्म के बाद किस उम्र तक बच्चों का श्राद्ध शास्त्रों के अनुसार उचित है।

क्या गर्भ में ही बच्चे की मृत्यु हो जाने पर श्राद्ध करना चाहिए?

कई बार गर्भावस्था के दौरान किसी कारणवश बच्चे की मृत्यु हो जाने पर शास्त्रों के अनुसार उसका श्राद्ध कर्म नहीं किया जाता है। मलिन षोडशी की परंपरा गर्भस्थ शिशु की आत्मा की शांति के लिए की जाती है। मलिन षोडशी हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद का एक कर्मकांड है, जो मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति और परिवार को अशुभ प्रभावों से बचाने के लिए किया जाता है। मलिन षोडशी कर्मकांड मृत्यु से लेकर अंतिम संस्कार तक किया जाता है।

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किस आयु तक के बच्चों का श्राद्ध नहीं किया जाता?

वहीं, जन्म के बाद मृत बच्चों के श्राद्ध के नियम मृत्यु के समय बच्चे की आयु पर निर्भर करते हैं। नवजात शिशु से लेकर 2 वर्ष से कम आयु के बच्चे का श्राद्ध नहीं होता, उनका भी मलिन षोडशी होती है और तर्पण किया जाता है क्योंकि उनके लिए पारंपरिक श्राद्ध कर्म नहीं किए जाते। इन बच्चों का श्राद्ध और वार्षिक कर्मकांड नहीं होते।

बच्चों का श्राद्ध किस तिथि को किया जाता है?

पितृ पक्ष में, 6 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे का श्राद्ध उसकी मृत्यु तिथि पर किया जाता है, लेकिन यदि तिथि ज्ञात न हो, तो त्रयोदशी को पूरे विधि-विधान से किया गया श्राद्ध बच्चे की मृत आत्मा तक पहुंचता है। यदि तिथि ज्ञात न हो तो त्रयोदशी तिथि को ही तर्पण करना चाहिए। इससे मोक्ष प्राप्ति होती है।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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