जीते-जी मरे हुए के समान होते हैं ये 14 तरह के लोग

Published : Feb 02, 2025, 08:00 PM IST
ramcharit manas life managment

सार

Ramcharit Manas Life Management: रामचरित मानस में 14 ऐसे लोगों के बारे में बताया है, कि यदि वे जीवित हों तो भी उन्हें मृतक के समान ही समझना चाहिए। जानें कौन-हैं ये 14 तरह के लोग? 

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के लंकाकांड में एक प्रसंग आता है, जब अंगद भगवान श्रीराम के दूत बनकर लंका जाते हैं और वहां रावण और अंगद के बीच बात-चीत होती है। इसी बात-चीत के दौरान अंगद रावण को बताते हैं कि किन 14 तरह के लोगों को मरे हुए के समान ही समझना चाहिए। जानें कौन-हैं वो 14 तरह के लोग…

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1. जो काम के अधीन हों: जो व्यक्ति अत्यंत भोगी हो, कामवासना में लिप्त रहता हो, वह मृतक समान है क्योंकि उसके मन की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती।

2. वाममार्गी: जो व्यक्ति हर बात के पीछे नकारात्मकता खोजता हो, नियमों, परंपराओं और लोक व्यवहार के खिलाफ चलता हो, उसे भी मृतक मानना चाहिए।

3. कंजूस: जो व्यक्ति पैसा होने पर भी जरूरी कामों में खर्च न करें, उसे भी मरे हुए के समान ही जानना चाहिए।

4. अति दरिद्र: जो व्यक्ति धन, सम्मान और साहस से हीन हो, वो भी मृतक ही माना गया है।

5. विमूढ़: जिसके पास विवेक और बुद्धि न हो, जो खुद निर्णय न ले सके। ऐसा व्यक्ति भी जीवित होते हुए मृतक के समान ही है।

6. अजसि: जो व्यक्ति घर, परिवार, कुटुंब, समाज, नगर या राष्ट्र, कहीं सम्मान नहीं पाता है, वह व्यक्ति मृतक समान ही होता है।

7. सदा रोगी: जो व्यक्ति निरंतर रोगी रहता है, वह भी मरा हुआ माना गया है।

8. अत्यंत वृद्ध: अत्यंत वृद्ध व्यक्ति भी मृतक समान होता है, क्योंकि वह अन्य लोगों पर आश्रित हो जाता है।

9. क्रोधी: जिस व्यक्ति का अपने मन और बुद्धि पर नियंत्रण न हो, जिसके कारण उसे बार-बार क्रोध आता हो, वह जीवित होकर भी जीवित नहीं माना जाता।

10. गलत कामों से पैसा कमाने वाला: जो व्यक्ति पाप कर्मों से पैसा कमाता है, उसे भी मरे हुए के समान समझना चाहिए।

11. तनु पोषक: ऐसा व्यक्ति जो अपने ही स्वार्थ के लिए ही जीता है, किसी और के बारे में नहीं सोचता, उसे भी मरा हुआ ही मानना चाहिए।

12. निंदक: अकारण निंदा करने वाला व्यक्ति भी मरा हुआ होता है क्योंकि उसे दूसरों में सिर्फ कमियां ही नजर आती हैं।

13. विष्णु विमुख: जो व्यक्ति परमात्मा का विरोधी है यानी नास्तिक है, उसे भी मरा हुआ ही मानना चाहिए।

14. संत और वेद विरोधी: जो संत, ग्रंथ, पुराण और वेदों का विरोधी है, वह भी मृतक समान होता है।



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Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
 

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