Vidur Niti: महाभारत में महात्मा विदुर प्रमुख पात्रों में से एक थे। वे हस्तिनापुर के महामंत्री और धृतराष्ट्र व पांडु के छोटे भाई भी थे। उनकी बताई नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत काम की हैं। 

Vidur Niti Life Management: महात्मा विदुर महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक थे। उन्होंने हमेशा धर्म का साथ दिया। उनकी बताई नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत काम की हैं। उनकी नीतियों के संग्रह को विदुर नीति कहा जाता है। महात्मा विदुर ने अपनी एक नीति में 3 ऐसे लोगों के बारे में बताया है, जो खुद की ही धन-संपत्ति के मालिक नहीं होते, चाहे वे कितना भी पैसा कमा लें। आगे जानिए कौन-हैं ये 3 लोग…

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विदुर नीति का श्लोक

त्रय एवाधना राजन् भार्या दासस्तथा सुत:।
यत्ते समाधिगच्छन्ति यस्य ते तस्य तद्धनम्।।

अर्थ- ये तीन धन के अधिकारी नहीं माने जाते- स्त्री, पुत्र और दास। ये जो कुछ भी कमाते हैं, वह उसी का होता है, जिसके अधीन ये रहते हैं।

स्त्री के धन किसका?

महात्मा विदुर के अनुसार, जब तक लड़की का विवाह नहीं होता, तब तक उसकी कमाई पर पिता का अधिकार होता है और विवाह के बाद उसके कमाए धन पर पति का अधिकार होता है। इस तरह एक स्त्री अपने जीवनकाल में कितना भी धन-संपत्ति क्यों न कमा लें, लेकिन वो धन उसका कभी नहीं माना जाता। ये धन उसी का होता है जिसके अधीन वह रहती है।

पुत्र का धन किसका?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, पुत्र सदैव अपने पिता के ही अधीन रहता है, भले ही पिता बूढ़ा ही क्यों न हो गया। इसलिए पुत्र द्वारा कमाए गए धन पर पहला अधिकार पिता का ही माना गया है। जब तक पिता जीवित है पुत्र के धन पर उसका ही अधिकार माना जाता है।

दास यानी नौकर का धन किसका?

महात्मा विदुर के अनुसार, दास यानी नौकर कभी स्वतंत्र नहीं होता, वह हमेशा अपने मालिक के अधीन ही रहता है। इसलिए सेवा के बदले मालिक जो भी धन दास को देता है, उस पर भी मालिक का ही अधिकार पहला माना गया है। जरूरत पड़ने पर मालिक वह धन नौकर से वापस भी ले सकता है।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।