Tulsidas Jayanti 2024: पैदा होते ही क्या बोले तुलसीदास, कहां हुए राम के दर्शन?

Published : Aug 10, 2024, 10:57 AM IST
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सार

Tulsidas Jayanti 2024 Kab Hai: हर साल श्रावण मास में गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई जाती है। गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान श्रीराम के जीवन चरित पर अनेक ग्रंथ लिखे, उनमें से रामचरित मानस सबसे प्रमुख है। 

Goswami Tulsidas Rare Facts: हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मनाई जाती है। इस बार ये तिथि 11 अगस्त, रविवार को है। गोस्वामी तुलसीदास राम भक्ति शाखा के सबसे प्रमुख कवि हैं। उनके द्वारा लिखी गई श्रीरामचरित मानस सबसे प्रमुख ग्रंथ हैं। इसके अलावा गीतावली, कवितावली, कृष्ण गीतावली, रामज्ञा प्रश्नावली, हनुमान बाहुक, विनय पत्रिका भी उनके ही ग्रंथ हैं। तुलसीदासजी की जयंती के मौके पर जानिए उनसे जुड़ी खास बातें…

पैदा होते ही क्या बोलें तुलसीदास?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, गोस्वामी तुलसीदास का जन्म संवत् 1554 में हुआ था। उन्होंने जन्म लेते ही राम बोला था। इसलिए इनके माता-पिता ने इनका नाम रामबोला रखा। आचार्य शेषसनातनजी इनके गुरु थे, उन्हीं के पास रहकर इन्होंने वेदों का अध्ययन किया। इनकी पत्नी का नाम रत्नावली था।

शिवजी के कहने पर लिखी रामचरित मानस
मान्यता है कि एक बार तुलसीदासजी के सपने में भगवान शंकर आए और उन्हें भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र पर ग्रंथ लिखने को कहा। और ये भी कहा कि तुम्हारी ये रचना कविता सामवेद के समान फलवती होगी। तुलसीदासजी भगवान शिव की आज्ञा पर अयोध्या आए और यहां रहकर श्रीरामचरितमानस की रचना की। श्रीरामचरितमानस लिखने में तुलसीदासजी को 2 वर्ष, 7 महीने व 26 दिन का समय लगा।

कहां किए श्रीराम के दर्शन?
मान्यता है कि तुलसीदास जी को स्वयं भगवान श्रीराम ने दर्शन दिए थे। इसके पहले उनकी मुलाकात हनुमानजी से हुई। एक बार जब तुलसीदासजी चित्रकूट के घाट पर लोगों को चंदन लगा रहे थे, तभी एक बालक भी उनके पास चंदन लेने आया। तब हनुमानजी ने तोते के रूप में आकर कहा कि- ‘चित्रकूट के घाट पर, भई सन्तन की भीर। तुलसीदास चन्दन घिसें, तिलक देत रघुबीर। तुलसीदासजी समझ गए कि ये बालक और कोई नहीं ब्लकि स्वयं भगवान श्रीराम हैं। इस तरह तुलसीदासजी को भगवान श्रीराम के दर्शन हुए।

 

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