कहां है ‘इश्किया गणेश मंदिर’? जहां दर्शन करने से प्रेमियों की हर मुराद होती है पूरी

Published : Apr 15, 2025, 07:01 PM IST
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सार

Ishqiya Ganesh Temple: 16 अप्रैल, बु‌धवार को संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा विशेष रूप से की जाती है। वैसे तो हमारे देश में श्रीगणेश के अनेक मंदिर हैं लेकिन इन सभी में जोधपुर का इश्किया गणेश मंदिर बहुत खास है।  

Ishqiya Ganesh Temple Jodhpur: हिंदू धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य कहा जाता है यानी किसी भी शुभ कार्य से पहले गजानन की पूजा पहले की जाती है। श्रीगणेश के अनेक प्राचीन और चमत्कारी मंदिर भी हमारे देश में हैं। ऐसा ही एक मंदिर है जोधपुर का इश्किया गणेश मंदिर। ये नाम सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन यहां की विशेषता देखकर ये नाम बिल्कुल सही साबित होता है। विकट संकष्टी चतुर्थी (16 अप्रैल, बुधवार) के मौके पर जानिए इश्किया गणेश मंदिर से जुड़ी रोचक बातें…

कैसे बड़ा गणेश मंदिर का ये नाम?

इश्किया गणेश मंदिर राजस्थान के जोधपुर में परकोटे के भीतर आडा बाजार जूनी मंडी में है। पहले कभी इस मंदिर को गुरु गणपति के नाम से जाना जाता था। लेकिन बाद में यहां प्रेमी जोड़ों का जमावड़ा लगने लगा और उनकी मुराद पूरी होने लगी, जिससे चलते इस मंदिर को इश्किया गणेश मंदिर के नाम से जाना जाने लगा। धीरे-धीरे इस मंदिर की ख्याति पूरे देश में फैल गई। वैसे तो यहां रोज भी अनेक प्रेमी जोड़े आते हैं लेकिन बुधवार को तो यहां मेला सा लग जाता है। प्रेमी जोड़ों के साथ-साथ विवाहित जोड़े भी यहां दर्शन के लिए आते हैं।

कितना पुराना है ये मंदिर?

इस मंदिर से जुड़ी कईं कथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि ये मंदिर लगभग 100 साल पुराना है। मान्यता है कि राजा मानसिंह के समय जोधपुर के किसी तालाब में खुदाई का कार्य चल रहा था, उस समय खुदाई के दौरान भगवान श्रीगणेश की एक प्रतिमा निकली, जिसे जूनी मंडी में बने एक चबूतरे पर स्थापित कर दिया। बाद में यहां एक भव्य मंदिर बना दिया। तब से भगवान श्रीगणेश का ये मंदिर लोगों के आस्था का प्रतीक बन गया है।

लव लाइफ की परेशानियां होती हैं दूर

मान्यता है कि प्रेमी जोड़े जो भी मुराद यहां मांगते हैं, उनकी इच्छा जरूर पूरी होती है। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति की मैरिड लाइफ में परेशानियां चल रही हों और वो यहां आकर जोड़े से दर्शन करे तो उसकी समस्या का समाधान बहुत जल्दी हो जाता है। यहां कारण है कि इस मंदिर में लोग अकेले नहीं बल्कि जोड़े से दर्शन करने आते हैं।


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