हलहारिणी और हरियाली अमावस्या में क्या अंतर है?

Published : Jun 25, 2025, 09:16 AM IST
hariyali amawasya 2025

सार

Halharini Amavasya 2025: हलहारिणी और हरियाली अमावस्या, बहुत से लोग इन दोनों को एक ही मानते हैं लेकिन ये सच नहीं है। ये दोनों अमावस्या अलग-अलग हैं और इनका महत्व भी।  

Halharini aour Hariyali Amavasya Mai Kya Antar Hai: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या होती है। इस तरह एक साल में कुल 12 अमावस्या का संयोग बनता है। इन सभी अमावस्या का अलग-अलग नाम और महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। हलहारिणी और हरियाली अमावस्या भी इनमें से एक है। सुनने में ये दोनों नाम एक जैसे लगे लेकिन ये दोनों अलग-अलग हैं। बहुत से लोग इन्हें एक ही मानते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। आगे जानिए हलहारिणी और हरियाली अमावस्या का महत्व और इनकी डेट्स…

कब आती है हलहारिणी अमावस्या 2025? (Halharini Amavasya Kab Hai)

धर्म ग्रंथों के अनुसार, हिंदू पंचांग के चौथे महीने आषाढ़ की अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। इस दिन किसान अपने हल सहित अन्य कृषि उपकरणों की पूजा करता है क्योंकि ये समय खेती के लिए बहुत उपयुक्त होता है। किसान हल की पूजा करके उसके प्रति अपना आभार प्रकट करता है और ये आशा करता है कि हर बार की तरह इस बार भी उसकी खेती अच्छी हो। इस बार हलहारिणी अमावस्या का पर्व 25 जून, बुधवार को है।

कब है हरियाली अमावस्या 2025? (Hariyali Amavasya Kab Hai)

हिंदू पंचांग के पांचवें महीने सावन की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं। सावन में चारों ओर पेड़-पौधों की हरियाली नजर आती है, इसलिए इसे हरियाली अमावस्या कहते हैं। इस दिन पौधारोपण करने का भी महत्व है। हरियाली अमावस्या पर अनेक स्थान पर मेले लगते हैं, कहीं दंगल का आयोजन होता है तो कहीं महिलाएं झूला झूलती हैं। हरियाली अमावस्या पर शिवजी की पूजा भी विशेष महत्व है। इस बार हरियाली अमावस्या 24 जुलाई, गुरुवार को है।

क्यों खास है अमावस्या तिथि?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव हैं, इसलिए इस तिथि पर पितरों की शांति के लिए विशेष उपाय जैसे श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण आदि किए जाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, वे यदि अमावस्या पर ये उपाय करें तो उनकी समस्या काफी हद तक दूर भी हो सकती है। अमावस्या तिथि पर कईं बड़े त्योहार भी मनाए जाते हैं जैसे दीपावली, भूतड़ी अमावस्या, कुशग्रहणी अमावस्या आदि।

इस दिन बढ़ जाता है निगेटिव एनर्जी का खतरा

मान्यता है कि अमावस्या पर चंद्रमा दिखाई न देने से निगेटिव एनर्जी (भूत-प्रेत) की शक्ति काफी बढ़ जाती है। इसलिए अमावस्या पर सुनसान स्थान, श्मशान या नदी के पास जाने को मना किया जाता है। अमावस्या से जुड़ी और भी कईं मान्यताएं हमारे समाज में प्रचलित है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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