Amavasya Facts: अमावस्या पर ही क्यों करते हैं पितरों की शांति के लिए श्राद्ध-पिंडदान?

Published : Nov 16, 2025, 02:53 PM IST
Amavasya Tithi Interesting Facts

सार

Amavasya Facts: ज्योतिष शास्त्र में कुल 16 तिथियां बताई गई हैं। इनमें से अमावस्या भी एक है। इस तिथि पर ही पितरों की शांति के लिए श्राद्ध-तर्पण आदि कार्य किए जाते हैं। जानें क्यों खास ये तिथि?

Amavasya Tithi Interesting Facts: हिंदू धर्म में तिथियों का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि तिथि को देखकर ही व्रत-उत्सव आदि का निर्णय लिया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में कुल 16 तिथियां बताई गई हैं, इनमें से प्रतिपदा से लेकर चतुर्दशी तिथि को दोनों पक्षों (शुक्ल व कृष्ण) में होती है। इनके अलावा पूर्णिमा व अमावस्या तिथि भी होती है। इस तरह कुल 16 तिथियां होती हैं। इन सभी तिथियों के अलग-अलग स्वामी यानी देवता भी धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। इन सभी तिथियों में अमावस्या का विशेष महत्व है। जानें अमावस्या तिथि से जुड़े रोचक फैक्ट…

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कब आती है अमावस्या तिथि?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन 15 दिनों में चंद्रमा का आकार धीरे-धीरे घटता है, उसे कृष्ण पक्ष कहते हैं। कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को ही अमावस्या कहते हैं। इस दिन चंद्रमा बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता। इस तिथि पर चंद्रमा की रोशनी पृथ्वी पर बिल्कुल नहीं आती जिससे कारण ये अमावस्या तिथि की रात्रि में सबसे ज्यादा अंधकार मय होती है। ऐसी भी मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर निगेटिव एनर्जी यानी भूत-प्रेत जैसी शक्तियों का प्रभाव काफी अधिक हो जाता है।

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अमावस्या तिथि के स्वामी कौन हैं?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देवता हैं, यही कारण है कि इसी तिथि पर पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि किया जाता है। ऐसा करने से पितृ दोष के अशुभ प्रभाव में कमी आती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार दिवाली भी अमावस्या तिथि पर ही मनाया जाता है। एक साल में कुल 12 अमावस्या आती है, अधिक मास में इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है।

कब बनता है अमावस्या तिथि का संयोग?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य व चंद्रमा एक ही राशि में होते हैं तो अमावस्या तिथि का संयोग बनता है। ऐसा महीने में सिर्फ एक बार होता है। चंद्रमा की सोलह कलाओं में सोलहवीं कला को अमा कहा जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार-
अमा षोडशभागेन देवि प्रोक्ता महाकला।
संस्थिता परमा माया देहिनां देहधारिणी।।
अर्थ- अमा को चंद्र की महाकला गया है, इसमें चंद्र की सभी सोलह कलाओं की शक्तियां शामिल होती हैं। इस कला का क्षय और उदय नहीं होता है।

 

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