वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 2026: जानें सही डेट, पूजा विधि, मंत्र, महत्व और कथा

Published : Jun 28, 2026, 08:10 AM IST
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 2026

सार

Vat Savitri Puja Muhurat: हिंदू धर्म में परिवार की खुशहाली के लिए महिलाएं अनेक व्रत करती हैं. वट सावित्री पूर्णिमा व्रत भी इसमें से एक है।

Vat Savitri Purnima Date 2026: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत विवाहित महिलाओं के प्रमुख व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि तथा संतान के कल्याण की कामना से किया जाता है। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन वट (बरगद) वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। साल 2026 में वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 29 जून, सोमवार को किया जाएगा। जानें इस व्रत की विधि, मंत्र, महत्व और कथा की डिटेल...

ये भी पढ़ें-
July 2026 Hindu Calendar: कब से शुरू होगा सावन? जानें गुरु पूर्णिमा गुप्त नवरात्रि और एकादशी की डेट्स

वट सावित्री पूर्णिमा मुहूर्त

सुबह 07:28 से 09:09 तक
सुबह 09:09 से 10:49 तक
दोपहर 12:03 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:10 से 03:51 तक

ये भी पढ़ें-
Chanakya Niti: पिता अपने बेटे के लिए और पत्नी पति के लिए कब बन जाते हैं दुश्मन?

इस विधि से करें वट सावित्री पूर्णिमा व्रत

- 29 जून, सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।
- पूजा की टोकरी में सात प्रकार के अनाज, भगवान ब्रह्मा, देवी सावित्री तथा अन्य पूजन सामग्री रखें।
- वट (बरगद) वृक्ष के पास जाकर भगवान ब्रह्मा, देवी सावित्री, भगवान शिव-पार्वती, यमराज तथा सावित्री-सत्यवान का पूजन करें।
ये मंत्र बोलते हुए अर्घ्य अर्पित करें—
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते।।
- इसके बाद वट वृक्ष पर जल अर्पित करते हुए यह मंत्र पढ़ें—
वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमैः।
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा।।
- वट वृक्ष की 11 या 21 परिक्रमा करें और कच्चा सूत लपेटें। घी का दीपक जलाकर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें तथा परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लें।

 वट सावित्री व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य, पारिवारिक सुख-समृद्धि और संतान के कल्याण की कामना से किया जाता है। वट वृक्ष को दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

सावित्री-सत्यवान की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ, जिसकी आयु अल्प बताई गई थी। निर्धारित समय पर जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, तब सावित्री अपनी बुद्धिमत्ता, दृढ़ संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज को प्रसन्न कर अनेक वरदान प्राप्त किए। अंततः यमराज ने सत्यवान को पुनः जीवनदान दिया। इसी घटना की स्मृति में वट सावित्री व्रत किया जाता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Aniruddhacharya Maharaj Video: प्यार में लड़की धोखा दे तो क्या करें? सुनें अनिरुद्धाचार्य महाराज का मजेदार जवाब
July 2026 Hindu Calendar: कब से शुरू होगा सावन? जानें गुरु पूर्णिमा गुप्त नवरात्रि और एकादशी की डेट्स