
Ashirwad Suryavanshi: बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर स्थित मोतीपुर गांव का सूर्यवंशी परिवार पहले से ही युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की वजह से चर्चा में है। अब परिवार का एक और मेंबर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। वैभव के छोटे भाई 10 साल के आशीर्वाद सूर्यवंशी ने अपने शुरुआती क्रिकेट सफर में ही ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने सभी को प्रभावित किया है। क्रिकेट एकेडमी ताजपुर के लिए खेले गए अपने पहले ही मैच में आशीर्वाद ने शानदार शतक जड़ दिया। महज 6 महीने पहले क्रिकेट खेलना शुरू करने वाले इस युवा खिलाड़ी ने एक प्रैक्टिस मैच में 87 गेंदों पर 103 रन बनाए। उसकी पारी में 20 चौके और एक छक्का शामिल था।
हालांकि, यह पारी लोकल लेवल के क्रिकेट मैच में खेली गई थी, लेकिन इसकी चर्चा तब पूरे देश में होने लगी जब वैभव सूर्यवंशी ने अपने छोटे भाई के स्कोरकार्ड का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किया। वैभव इस समय श्रीलंका में ट्राई-सीरीज के दौरान इंडिया ए टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके द्वारा की गई इस पोस्ट के बाद क्रिकेट प्रेमियों की नजरें आशीर्वाद सूर्यवंशी पर भी टिक गईं और लोग उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गए।
आशीर्वाद की यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उसने केवल छह महीने पहले ही क्रिकेट खेलना शुरू किया है। इतने कम समय में शतक लगाना उसके टैलेंट और मेहनत को दिखाता है। क्रिकेट एकेडमी ताजपुर के संचालक और आशीर्वाद के कोच चंद्र दीप ने एक इंटरव्यू में बताया कि आशीर्वाद ने बहुत तेजी से खेल की बारीकियां सीखीं। उन्होंने सिर्फ 6 महीने पहले क्रिकेट खेलना शुरू किया था। उसने बैट पकड़ना और सही ग्रिप बनाना बहुत जल्दी सीख लिया।
आशीर्वाद का क्रिकेट सफर उसी माहौल में शुरू हुआ है, जहां से वैभव सूर्यवंशी ने अपने सपनों को आकार दिया था। परिवार के घर के पीछे प्रैक्टिस के लिए 2 पिचें बनाई गई हैं। इनमें एक कंक्रीट की और दूसरी मिट्टी की पिच है। वैभव ने बचपन में इन्हीं पिचों पर घंटों अभ्यास करके अपनी बल्लेबाजी को मजबूत किया था। अब आशीर्वाद भी उसी रास्ते पर चलते हुए उन्हीं पिचों पर रेगुलर प्रैक्टिस कर रहा है।
कोच चंद्र दीप के अनुसार, दोनों पिचों का नेचर अलग है और यही खिलाड़ियों को अलग-अलग परिस्थितियों के लिए तैयार करती है। उन्होंने बताया कि सीमेंट वाली पिच पर गेंद काफी तेज गति से आती है, जबकि मिट्टी वाली पिच पर गेंद स्विंग, टर्न और स्पिन करती है। साथ ही कई बार गेंद रुककर भी आती है, जिससे बल्लेबाजी करना मुश्किल हो जाता है। कोच का मानना है कि वैभव के खेल को निखारने में इन पिचों की बड़ी भूमिका रही है और अब आशीर्वाद भी उसी तरह की कड़ी मेहनत कर रहा है।
हालांकि, दोनों भाइयों की तुलना होना स्वाभाविक है, लेकिन उनके खेलने का अंदाज काफी अलग है। वैभव सूर्यवंशी बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और जरूरत पड़ने पर स्पिन गेंदबाजी भी कर सकते हैं। वहीं आशीर्वाद दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और दाएं हाथ से मीडियम पेस गेंदबाजी करते हैं। आशीर्वाद खुद को एक ऑलराउंडर के रूप में देखता है और बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी योगदान देना चाहता है।
आशीर्वाद ने बचपन से ही वैभव को अभ्यास करते और मैच खेलते हुए देखा है। घर हो या क्रिकेट मैदान, वह हमेशा अपने बड़े भाई के खेल को ध्यान से देखता रहा है। धीरे-धीरे उसके अंदर भी क्रिकेट के प्रति रुचि बढ़ी और उसने खुद इस खेल को अपनाने का फैसला किया। कोच चंद्र दीप के अनुसार, आशीर्वाद स्वभाव से काफी शांत है और ज्यादा बात करने के बजाय अपने खेल पर ध्यान देना पसंद करता है।
अगर वैभव सूर्यवंशी की सफलता का सबसे ज्यादा जश्न कोई मनाता है, तो वह आशीर्वाद हैं। आईपीएल 2026 में वैभव के शानदार प्रदर्शन और अंडर-19 विश्व कप में उनके बेहतरीन खेल के दौरान आशीर्वाद ने घर पर पटाखे फोड़कर खुशी मनाई थी। जब भी टीवी पर वैभव का मैच आता है, वह पूरे ध्यान से उसे देखता है और अपने बड़े भाई से प्रेरणा लेता है।
दूसरे युवा क्रिकेटरों की तरह आशीर्वाद का भी एक पसंदीदा शॉट है। उन्हें कवर ड्राइव खेलना सबसे ज्यादा पसंद है। उनकी दिनचर्या का बड़ा हिस्सा क्रिकेट को समर्पित है। सुबह वह फिटनेस और फिजिकल ट्रेनिंग करते हैं, जिसके बाद लंबे समय तक बल्लेबाजी की प्रैक्टिस करते हैं। क्रिकेट के अलावा अगर उन्हें किसी चीज से सबसे ज्यादा लगाव है तो वह है मछली। खाने में उन्हें मछली बेहद पसंद है। दिलचस्प बात यह है कि जहां वैभव बचपन में मटन खाने के शौकीन थे, वहीं आशीर्वाद की पहली पसंद मछली है।