गौतम गंभीर के लिए क्या है सबसे मुश्किल काम, बतौर हेड कोच कैसे लेते हैं टीम इंडिया के फैसले

Published : Nov 02, 2026, 01:31 PM IST
Gautam Gambhir

सार

गौतम गंभीर ने माना कि टीम इंडिया की कोचिंग के दौरान वह मानसिक रूप से थक जाते हैं। उन्होंने कहा कि कोच का काम लोकप्रिय नहीं, सही फैसले लेना है।

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उनके कोच रहते हुए भारतीय टीम ने 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी और 2026 में T20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर बड़ी सफलता हासिल की। हालांकि, इस दौरान टीम को कुछ निराशाजनक हार का सामना भी करना पड़ा, खासकर टेस्ट क्रिकेट में।

रविवार को भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की रोमांचक T20I सीरीज का समापन हुआ। इसके बाद गौतम गंभीर ने अपने कोचिंग एक्सपीरियंस और पिछले कुछ महीनों के दबाव को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले चार-पांच महीनों में अलग-अलग फॉर्मेट, परिस्थितियों और खिलाड़ियों के अलग-अलग स्वभाव को संभालना उनके लिए मानसिक रूप से थकाने वाला रहा है। हालांकि, गंभीर ने यह भी साफ किया कि वह इस तरह के दबाव से निपटने में सक्षम हैं और लंबे समय तक मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं।

गौतम गंभीर बोले- मैं भी इंसान हूं, कभी-कभी थकान होती है

  • गौतम गंभीर ने माना कि मुख्य कोच की जिम्मेदारी निभाते हुए कई बार उन्हें मानसिक थकान महसूस हुई है। अलग-अलग फॉर्मेट में टीम को संभालना और खिलाड़ियों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना आसान नहीं होता। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि उनका स्वभाव मुश्किलों से लड़ने और दबाव में काम करने का है।
  • गंभीर ने कहा, “हां, सच कहूं तो ऐसा हुआ है। लेकिन मैं इतना मजबूत हूं कि इसे संभाल सकूं। मैं लंबे समय तक इस दबाव को झेल सकता हूं। मेरा स्वभाव ही ऐसा है। मैं दबाव झेल सकता हूं और मुश्किलों का सामना कर सकता हूं। हां, मैं भी एक इंसान हूं, इसलिए कभी-कभी मुझे थकान महसूस हो सकती है। लेकिन अब तक मैं इसे संभालने में कामयाब रहा हूं।”
  • उनके इस बयान से साफ है कि भारतीय टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी के साथ आने वाला दबाव उनके लिए भी चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन वह इससे पीछे हटने के बजाय लगातार काम कर रहे हैं।

गौतम गंभीर को क्या लगती है सबसे बड़ी चुनौती?

  • गौतम गंभीर ने टीम चयन और प्लेइंग XI में जगह नहीं बना पाने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि हेड कोच के तौर पर कई बार ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जो सभी खिलाड़ियों या प्रशंसकों को पसंद नहीं आते।
  • उनके मुताबिक, कोच का काम लोकप्रिय फैसले लेना नहीं, बल्कि टीम के हित में सही फैसला करना है। ड्रेसिंग रूम में मौजूद हर खिलाड़ी को मौका देना संभव नहीं होता। ऐसे में जिन खिलाड़ियों को प्लेइंग XI में जगह नहीं मिलती, उन्हें फैसले के पीछे की वजह समझाना भी जरूरी होता है।
  • गंभीर ने कहा, "यह मेरा काम है। मैंने पहले भी कहा है कि मेरा काम सही फैसला लेना है, न कि लोकप्रिय फैसला। ड्रेसिंग रूम में बैठकर ऐसे लोकप्रिय फैसले लेना बहुत आसान है, जिन्हें लोग मुझसे सुनना चाहते हैं।
  • लेकिन मेरा काम ड्रेसिंग रूम को सुरक्षित माहौल देना और उन खिलाड़ियों को समर्थन और स्पष्टता देना है, जिन्होंने लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन किया है।"

गौतम गंभीर ने बताया, कोच के लिए ईमानदारी और पारदर्शिता जरूरी

  • गंभीर ने माना कि टीम से बाहर रहने वाले खिलाड़ियों के साथ बातचीत करना किसी भी कोच के लिए आसान नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर टीम के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ी होते हैं, लेकिन सभी को एक साथ प्लेइंग XI में शामिल नहीं किया जा सकता।
  • ऐसी स्थिति में खिलाड़ियों के साथ ईमानदार रहना और उन्हें फैसले की सही वजह बताना बेहद जरूरी है। गंभीर के मुताबिक, मुख्य कोच के रूप में उन्हें हर खिलाड़ी के साथ स्पष्ट और पारदर्शी व्यवहार करना चाहिए।
  • उन्होंने आगे कहा, "एक कोच के तौर पर ऐसी बातचीत हमेशा मुश्किल होती है। सभी अंतरराष्ट्रीय टीमों में टैलेंट होता है। मेरे लिए ईमानदारी, स्पष्टवादी होना और पूरी तरह से पारदर्शी रहना बहुत जरूरी है।
  • एक मुख्य कोच का यही काम है। जब तक मैं ऐसा करता हूं, मैं किसी की भी आंखों में आंखें डालकर किसी भी सवाल का जवाब दे सकता हूं।"
  • गंभीर के इस बयान से उनकी कोचिंग की सोच का पता चलता है। उनका मानना है कि टीम को सफल बनाने के लिए सही फैसले लेना, खिलाड़ियों को समर्थन देना और उनके साथ ईमानदार रहना सबसे जरूरी है।

PREV
Read more Articles on

Recommended Stories

IND vs NZ: भुवनेश्वर को खिलाना सबसे बड़ी गलती, पूर्व क्रिकेटर ने BCCI के फैसले पर क्यों उठाए सवाल?
IND vs NZ: 'मेरा काम सबको खुश करना नहीं..', सूर्यवंशी के सवाल पर ये क्या बोल गए गौतम गंभीर