
अहमदाबादः टी 20 वर्ल्ड कप का फाइनल टीम इंडिया ने जोरदार अंदाज में जीता। रंग पंचमी और महिला दिवस के मौके पर भारत की 140 करोड़ जनता को इससे बड़ा तोहफा नहीं मिल सकता था। सूर्या ब्रिगेड ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से करारी शिकस्त दी। रातभर पूरा देश दीवाली-होली मनाता रहा। पटाखे फोड़ता रहा, अबीर और गुलाल उड़ाता रहा। बता दें, रविवार 08 मार्च को अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मैच में टीम इंडिया के 256 रन के टारगेट का पीछा करते हुए मेहमान टीम 159 पर धराशायी हो गई। आइए जानते हैं, टीम इंडिया की जीत में कौन-कौन से फैक्टर्स ने काम किया…
कहानी 2021 T20 वर्ल्ड कप से शुरू हुई, जब टीम इंडिया सुपर-8 से ही बाहर हो गई थी। इस हार ने भारतीय T20 क्रिकेट का पूरा अंदाज़ बदलकर रख दिया। पहले रोहित-द्रविड़ और फिर सूर्यकुमार-गंभीर की जोड़ी ने टीम को एक सीधा सा मंत्र दिया - fearless cricket यानी निडर खेल।
अब टीम का फोकस औसत से ज़्यादा स्ट्राइक रेट पर था। बल्लेबाज़ों को पहली गेंद से ही हमला करने की खुली छूट दी गई। फंडा साफ था - विकेट गिरे तो गिरे, पर जब तक क्रीज़ पर हो, रन बरसाते रहो। अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या, सूर्यकुमार, रिंकू सिंह और शिवम दुबे जैसे इसी सोच वाले खिलाड़ियों को टीम में जगह मिली। इसका नतीजा ये हुआ कि आज भारत T20 क्रिकेट में नंबर-1 है और पावर-प्ले (पहले 6 ओवर) में 75-80 रन बनाना टीम के लिए आम बात हो गई है।
T20 में भारत के इतने खतरनाक बनने के पीछे इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का बहुत बड़ा हाथ है। IPL टीम इंडिया के लिए टैलेंट तैयार करने वाली एक फैक्ट्री की तरह काम कर रहा है।
अभिषेक शर्मा, रिंकू सिंह, अर्शदीप सिंह और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी इसका सबसे बड़ा सबूत हैं। ये सभी जब टीम इंडिया में आए, तो पहले दिन से ही इंटरनेशनल क्रिकेट का दबाव झेलने के लिए तैयार थे। इसी वजह से जब रोहित शर्मा, विराट कोहली, आर. अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे दिग्गज टीम से दूर हुए, तो उनकी जगह भरने में कोई मुश्किल नहीं हुई। रोहित की जगह अभिषेक, कोहली की जगह तिलक, अश्विन की जगह वरुण और जडेजा की जगह अक्षर ने आसानी से ले ली।
पिछले 5 सालों में भारत की गेंदबाज़ी का तरीका भी बदला है। टीम अब रन बचाने वाली डिफेंसिव बॉलिंग की जगह विकेट चटकाने वाली अटैकिंग बॉलिंग करती है। सोच ये है कि भले ही कुछ रन ज़्यादा चले जाएं, लेकिन विकेट लगातार मिलने चाहिए।
जब टीम में जसप्रीत बुमराह जैसा दुनिया का बेहतरीन गेंदबाज़ हो, तो दूसरे बॉलर्स को खुलकर अटैक करने की आज़ादी मिल जाती है। उन्हें पता होता है कि रन रोकने के लिए बुमराह हैं। इसलिए बाकी गेंदबाज़ बल्लेबाज़ों को बड़े शॉट खेलने का लालच देकर विकेट निकालते हैं। ये रणनीति भारत के लिए सुपरहिट साबित हुई है।
रोहित शर्मा ने टीम के खेलने का ये आक्रामक अंदाज़ सेट किया और 2024 में वर्ल्ड कप जिताया। उनके रिटायरमेंट के बाद कप्तानी सूर्यकुमार यादव को मिली। सूर्या ने भी कप्तानी को पानी की तरह आसान बना दिया और टीम के खेलने का वही स्टाइल जारी रखा जो रोहित के समय था।
आज टीम इंडिया में जगह बनाना बहुत मुश्किल है। एक-एक पोज़ीशन के लिए कई खिलाड़ियों के बीच ज़बरदस्त मुकाबला है। इसलिए, खिलाड़ी टीम की ज़रूरत के हिसाब से किसी भी बैटिंग ऑर्डर पर खेलने के लिए तैयार रहते हैं। इससे टीम को किसी भी मुश्किल हालात से मैच जीतने में मदद मिलती है।
* जीत का रिकॉर्ड: T20 में भारत का जीत का प्रतिशत 72% है, जो पिछले 5 सालों में किसी भी दूसरी टीम से ज़्यादा है।
* द्विपक्षीय सीरीज़ में दबदबा: अगस्त 2023 के बाद से भारत कोई भी द्विपक्षीय T20 सीरीज़ नहीं हारा है।
* दो बार वर्ल्ड चैंपियन: टीम इंडिया ने लगातार दो T20 वर्ल्ड कप जीते हैं। ऐसा करने वाली वो पहली टीम है।
* रिकॉर्ड्स की बारिश: पिछले 5 सालों में भारत ने T20 क्रिकेट के लगभग सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 200+ का स्कोर बनाना तो अब बहुत आसान हो गया है। सूर्यकुमार की कप्तानी में भारत ने सिर्फ 51 मैचों में 16 बार 200 से ज़्यादा रन बनाए हैं।
इतना ही नहीं, पिछले 2 सालों में भारत ने 5 बार 250 से ज़्यादा का स्कोर बनाया है। 2026 के T20 वर्ल्ड कप में ही टीम ने दो बार 250+ रन बनाए, जो एक बड़ी बात है।