
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सीजन के पहले हाफ में टीवी पर मैच देखने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। टीवी रेटिंग में 18.8% की कमी आई है, जबकि औसत दर्शक संख्या 26% तक घट गई है। पिछले साल (2025) के मुकाबले टीवी की पहुंच भी कम हुई है।
लेकिन यह कहानी का सिर्फ एक पहलू है। भले ही टीवी पर दर्शक कम हुए हों, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर IPL नए कीर्तिमान बना रहा है। JioStar की रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ शुरुआती वीकेंड में ही 51.5 करोड़ से ज़्यादा डिजिटल दर्शक जुड़े और कुल 3,200 करोड़ मिनट का वॉच-टाइम दर्ज हुआ। इसका सीधा मतलब है कि दर्शक गायब नहीं हुए हैं, बल्कि वे टीवी स्क्रीन से स्मार्टफोन पर शिफ्ट हो गए हैं!
IPL की व्यूअरशिप में गिरावट की एक वजह 'क्रिकेट फटीग' यानी एक तरह की बोरियत भी हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर मैच में 220 से ज़्यादा का स्कोर, बैटिंग के लिए सपाट पिचें और लगातार छक्कों की बौछार ने मैचों को एकतरफा बना दिया है। फैंस का कहना है कि दस साल पहले 200 रन का पीछा करना नामुमकिन सा लगता था, लेकिन अब 225 रन भी आसानी से चेज़ हो रहे हैं, जिससे मैच का रोमांच कम हो गया है।
इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू टीवी पर विज्ञापन देने वालों की संख्या में 31% की भारी गिरावट है। इसकी बड़ी वजह फैंटेसी गेमिंग और बेटिंग ऐप्स पर लगी पाबंदियां हैं। इसके अलावा, ब्रांड्स अब टीवी के बजाय डिजिटल कैंपेन और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर ज़्यादा पैसा लगा रहे हैं।
आज की युवा पीढ़ी टीवी के सामने चार घंटे बैठकर पूरा मैच देखने के बजाय मोबाइल पर स्कोर चेक करना, हाइलाइट्स देखना या फिर कनेक्टेड टीवी पर स्ट्रीमिंग करना पसंद कर रही है। साथ ही, फैंटेसी क्रिकेट जैसे प्लेटफॉर्म्स लोगों को मैच से और ज़्यादा जोड़ रहे हैं।
कुल मिलाकर, IPL का क्रेज खत्म नहीं हो रहा है, बल्कि यह एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसा लगता है कि 2026 का सीजन भारतीय स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग के इतिहास में उस साल के तौर पर याद किया जाएगा, जब डिजिटल ने टीवी को पूरी तरह से पछाड़ दिया।