बेटे के लिए घर बेचा-कर्ज में डूबे, जेल भी गए पिता...अब बेटा मचा रहा IPL में धमाल

Published : Apr 11, 2026, 11:40 AM IST
Mukul Chaudhary

सार

21 वर्षीय मुकुल चौधरी ने KKR के खिलाफ 7 छक्के जड़कर लखनऊ को शानदार जीत दिलाई। यह उनकी कड़ी मेहनत और पिता के त्याग का नतीजा है, जिन्होंने बेटे के क्रिकेट करियर के लिए घर बेचा और कर्ज भी लिया।

कोलकाता: गुरुवार को KKR के खिलाफ लखनऊ को जीत के लिए आखिरी 22 गेंदों में 54 रनों की जरूरत थी। टीम के बड़े-बड़े बैट्समैन पवेलियन लौट चुके थे। क्रीज पर 21 साल के मुकुल चौधरी थे, जो 8 गेंदों पर सिर्फ 2 रन बनाकर खेल रहे थे। ज्यादातर लोगों ने मान लिया था कि KKR यह मैच जीत चुकी है। लेकिन अगली ही गेंद पर धोनी के अंदाज में हेलिकॉप्टर शॉट लगाकर मुकुल ने जो छक्का जड़ा, उसने न सिर्फ मुकुल में बल्कि मैच देख रहे दर्शकों में भी एक नई उम्मीद जगा दी।

इसके बाद तो स्टेडियम में छक्कों की बरसात हो गई। 21 साल के मुकुल ने 7 छक्के और 2 चौके जड़कर लखनऊ को शानदार जीत दिला दी। रातों-रात हर किसी की जुबान पर मुकुल का नाम था। लेकिन मुकुल के लिए यह सिर्फ एक दिन का खेल नहीं था, बल्कि यह उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा था। राजस्थान के रहने वाले मुकुल कहते हैं, 'मैं पिछले 5-6 महीने से रोज प्रैक्टिस कर रहा हूं। हर दिन 100-150 छक्के मारता था। मेरे शॉट्स में वो ताकत है। मैं एम.एस. धोनी को मैच खत्म करते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्हीं की तरह हेलिकॉप्टर शॉट की प्रैक्टिस करता था।'

पिछले साल दिसंबर में सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी में दिल्ली के खिलाफ आखिरी ओवर में जब 25 रन चाहिए थे, तब भी मुकुल ने राजस्थान को मैच जिताया था। इसी पारी के दम पर वो IPL टीमों की नजर में आए और नीलामी में लखनऊ ने उन्हें ₹2.60 करोड़ में खरीदा।

'बेटा पैदा हुआ तो क्रिकेटर बनाऊंगा', पिता ने देखा था ख्वाब!

लखनऊ को जीत दिलाने के बाद मुकुल के पिता दलीप चौधरी ने एक नेशनल मीडिया से बात करते हुए अपने संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा, 'मैंने 2003 में ग्रेजुएशन किया और उसी साल मेरी शादी हो गई। मेरा सपना था कि अगर बेटा हुआ तो उसे क्रिकेटर बनाऊंगा। जब वो छोटा था, तभी से मैंने उसे क्रिकेटर बनाने की हर कोशिश की और मैं कामयाब भी हुआ।'

मुकुल के लिए घर बेचा, कर्ज बढ़ा और जेल भी गए!

बेटे के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार पिता दलीप ने उसे छोटी उम्र में ही जयपुर की एक एकेडमी में डाल दिया था। शुरुआत में मुकुल बॉलिंग करते थे, लेकिन एकेडमी में कोई विकेटकीपर नहीं था, इसलिए उन्होंने कीपिंग करने का फैसला किया। बाद में कोच की सलाह पर उन्होंने बैटिंग पर ध्यान देना शुरू किया। 2016 में, उन्होंने घर से 70 किलोमीटर दूर सीकर की एक दूसरी एकेडमी में दाखिला लिया। इस बीच, पिता दलीप की आर्थिक हालत खराब होने लगी। उनकी कोई फिक्स आमदनी नहीं थी। बेटे का क्रिकेट करियर बनाने के लिए उन्होंने अपना घर बेचने का फैसला किया। दलीप बताते हैं, 'आमदनी नहीं थी तो मैंने अपना घर ही बेच दिया। उससे ₹21 लाख मिले। अगले साल होटल शुरू करने के लिए कर्ज लिया। वो चुका नहीं पाया तो जेल भी गया, लेकिन मैंने कभी किसी के साथ धोखा नहीं किया।'

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