भारतीय क्रिकेटर स्मृति मंधाना ने एक टेस्ट मैच के दौरान पीरियड्स होने पर खुलकर बात की है। उनके इस अनुभव ने महिला एथलीट्स की चुनौतियों पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। हाल ही में स्मृति ने अपना यह निजी अनुभव शेयर किया।
स्मृति मंधाना ने एक इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि टेस्ट मैच के बीच में उन्हें पीरियड्स आ गए। उन्हें सैनिटरी पैड बदलने के लिए अंपायर से इजाजत लेकर मैदान से बाहर जाना पड़ा। उनकी यह कहानी दिखाती है कि टॉप लेवल पर खेलते हुए महिला एथलीट्स को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। प्रोफेशनल स्पोर्ट्स में पीरियड्स पर खुलकर बात करने के लिए उनकी तारीफ हो रही है।
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बहस शुरू हो गई है!
मंधाना के इस खुलासे ने एक बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि पीरियड्स की वजह से किसी खिलाड़ी को मैदान से बाहर जाना पड़े तो क्रिकेट के नियम क्या कहते हैं? MCC क्रिकेट कानूनों और ICC के नियमों के मुताबिक, अंपायर चोट या बीमारी जैसे सही कारणों के लिए खिलाड़ियों को मैदान से बाहर जाने की इजाजत दे सकते हैं। इस दौरान एक सब्स्टीट्यूट फील्डर खेल सकता है, लेकिन वह बॉलिंग, विकेटकीपिंग या कप्तानी नहीं कर सकता।
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क्या ब्रेक ले सकते हैं?
ये कानून कुछ पाबंदियां भी लगाते हैं। अगर कोई बॉलर आठ मिनट से ज्यादा मैदान से बाहर रहता है, तो वापस आने के बाद उसे बॉलिंग करने के लिए उतने ही समय इंतजार करना पड़ता है। इसका असर ऑलराउंडर्स और बॉलर्स पर पड़ सकता है। हालांकि, नियमों की किताब में पीरियड्स का कहीं भी खास तौर पर जिक्र नहीं है। ऐसे में अंपायर अपने विवेक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मंधाना जैसे मामलों में अनिश्चितता बनी रहती है।
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एक बड़ी समस्या है
मंधाना का अनुभव महिला स्पोर्ट्स की एक बड़ी समस्या की ओर ध्यान खींचता है। मौजूदा कई नियम महिला एथलीट्स की शारीरिक सच्चाइयों को ध्यान में रखे बिना ही बनाए गए हैं।
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कोई व्यवस्था नहीं है!
जब तेज पेट दर्द, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग या पीरियड्स के दूसरे लक्षण प्रदर्शन पर असर डालते हैं, तो साफ गाइडलाइंस की कमी महसूस होती है। इंटरनेशनल क्रिकेट में अब 'कन्कशन सब्स्टीट्यूट' की इजाजत है, लेकिन पीरियड्स से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।