Vaibhav Suryavanshi Success Story: U19 वर्ल्ड कप फाइनल में 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेलने वाले वैभव सूर्यवंशी की संघर्ष से सफलता तक की कहानी। जानिए परिवार का बैकग्राउंड, मां-पिता का त्याग और 14 साल में बने क्रिकेट स्टार के लाइफ की रोचक बातें।
क्रिकेट की दुनिया में कुछ कहानियां सिर्फ रिकॉर्ड नहीं बनातीं, दिल भी जीत लेती हैं। ऐसी ही एक कहानी है बिहार के समस्तीपुर से निकले 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की, जिन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ अपनी ऐतिहासिक पारी से सबको चौंका दिया। 80 गेंदों में 175 रन ठोकने वाले वैभव की ये उड़ान सिर्फ प्रतिभा की नहीं, बल्कि परिवार के त्याग, संघर्ष और अटूट भरोसे की मिसाल है। जानिए भारतीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे का संघर्ष और उनकी फैमिली बैकग्राउंड।
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अंडर-19 फाइनल में वैभव सूर्यवंशी का बल्ला बना तूफान
इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में भारतीय ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने महज 55 गेंदों में शतक पूरा किया और 80 गेंदों में 175 रन की विस्फोटक पारी खेली। इस पारी ने न सिर्फ भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, बल्कि वैभव को एक बार फिर क्रिकेट जगत की सुर्खियों में ला दिया।
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14 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी के नाम बड़े-बड़े रिकॉर्ड
वैभव सूर्यवंशी की उम्र 14 साल है। उनका जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के समस्तीपुर में हुआ था। इतनी कम उम्र में उन्होंने IPL 2025 में डेब्यू कर इतिहास रच दिया और सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले खिलाड़ी बने। हालांकि उनकी उम्र को लेकर चर्चाएं भी हुईं, लेकिन मैदान पर उनके प्रदर्शन ने हर सवाल का जवाब दे दिया।
बेटे के क्रिकेट करियर के लिए मां ने नींद की कुर्बान, पिता ने छोड़ा काम
वैभव की सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ उनके परिवार का है। खुद वैभव ने ये बताया है कि उनकी मां रोजाना सिर्फ तीन घंटे की नींद लेती थीं। रात 11 बजे सोकर तड़के 2 बजे उठ जाती थीं, ताकि बेटे और उसके साथ प्रैक्टिस करने वाले बच्चों के लिए खाना बना सकें। वहीं पिता संजीव सूर्यवंशी ने बेटे के क्रिकेट सपने के लिए अपना काम तक छोड़ दिया। घर की जिम्मेदारी बड़े भाई ने संभाली और किसी तरह परिवार चलता रहा, लेकिन वैभव का सपना कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया गया।
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वैभव सूर्यवंशी की प्रैक्टिस के लिए रोज 11 टिफिन बनाती थी मां
वैभव की मेहनत भी उतनी ही खास रही। हर दिन जब वह प्रैक्टिस के लिए जाते, मां 11 टिफिन तैयार करती थीं, 10 उनके साथ खेलने वाले बच्चों के लिए और एक वैभव के लिए। कोच ने भी उन्हें शुरू से बड़े मंच के लिए तैयार किया। रोजाना कम से कम 600 गेंद खेलने की प्रैक्टिस कराई जाती थी। यही नहीं, भविष्य की चुनौती को देखते हुए 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आने वाली गेंदों का भी सामना कराया गया।
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पांच साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहे वैभव सूर्यवंशी
वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी के मुताबिक, बेटे ने महज पांच साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। सात साल की उम्र में उसकी प्रतिभा को पहचानकर उसे समस्तीपुर के पटेल मैदान में कोच ब्रिजेश झा के कैंप में भेजा गया। यहीं से वैभव के सपनों ने असली उड़ान भरी।
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वैभव सूर्यवंशी कौन से स्कूल से कर रहे पढ़ाई?
वैभव फिलहाल ताजपुर, बिहार स्थित डॉ मुक्तेश्वर सिन्हा मॉडेस्टी स्कूल में कक्षा 9 के छात्र हैं। पिता बताते हैं कि वह सुबह ट्यूशन जरूर जाते हैं, लेकिन परिवार ने पढ़ाई का दबाव नहीं डाला। उनका मानना है कि इस वक्त वैभव का फोकस क्रिकेट पर होना चाहिए।
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समस्तीपुर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक रहे वैभव सूर्यवंशी
समस्तीपुर की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकते वैभव सूर्यवंशी की कहानी बताती है कि जब मेहनत, परिवार का साथ और आत्मविश्वास एक साथ हो, तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है। आज वैभव की कामयाबी उनके संघर्ष की सबसे बड़ी जीत है।