Vaibhav Suryavanshi Father Occupation: अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में 175 रन ठोकने वाले वैभव सूर्यवंशी के पिता क्या करते हैं? जानिए किसान पिता संजीव सूर्यवंशी की मेहनत, जमीन बेचने की कुर्बानी और बेटे को क्रिकेट स्टार बनाने की कहानी।
अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास
बिहार के समस्तीपुर जिले के मोतीपुर गांव से निकलकर 14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रन ठोककर सबको चौंका दिया। इतनी कम उम्र में ऐसा प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट में बहुत कम देखने को मिलता है। इस पारी के बाद हर किसी के मन में सवाल है कि आखिर वैभव के पीछे कौन-सा परिवार और कौन-सी परवरिश है? वैभव सूर्यवंशी के पिता क्या करते हैं? जानिए
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कौन हैं वैभव सूर्यवंशी के पिता संजीव सूर्यवंशी, क्या करते हैं?
वैभव सूर्यवंशी के पिता का नाम संजीव सूर्यवंशी है। वह पेशे से किसान भी रहे हैं और दुकान भी चलाते थे। वह खुद भी कभी क्रिकेटर बनने का सपना देखते थे। हालांकि हालात ऐसे नहीं थे कि वह आगे बढ़ पाते। लेकिन उन्होंने तय कर लिया था कि जो सपना वह पूरा नहीं कर पाए, उसे अपने बेटे के जरिए जरूर जिएंगे।
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बेटे वैभव को क्रिकेटर बनाने के लिए दुकान-खेती छोड़ी, जमीन बेची
संजीव सूर्यवंशी ने बेटे वैभव सूर्यवंशी के क्रिकेट करियर के लिए बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी खेती की जमीन तक बेच दी ताकि वैभव की ट्रेनिंग, यात्रा और कोचिंग में कोई कमी न रहे। गांव में ही घर के पिछवाड़े सीमेंट की पिच बनवाई, ताकि बेटा रोज प्रैक्टिस कर सके। कोचिंग के लिए उन्होंने अपनी दुकान और दूसरे काम भी छोड़ दिए और पूरा वक्त वैभव को देने लगे।
हफ्ते में तीन दिन क्रिकेट ट्रेनिंग के लिए बेटे को पटना लेकर जाते
वैभव जब सिर्फ 9 साल के थे, तब उनके पिता उन्हें हर दूसरे दिन समस्तीपुर से पटना करीब 100 किलोमीटर दूर कोच मनीष ओझा के पास ट्रेनिंग के लिए ले जाते थे। सुबह 7:30 बजे प्रैक्टिस शुरू होती और शाम तक चलती, फिर उसी दिन घर वापसी। चार साल से ज्यादा समय तक यह सिलसिला चला। पिता हर ट्रेनिंग, हर मैच में बेटे के साथ खड़े रहे।
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वैभव सूर्यवंशी के पिता की कुर्बानी रंग लाई
वही वैभव सूर्यवंशी इतनी कम उम्र में IPL 2025 में राजस्थान रॉयल्स द्वारा 1.1 करोड़ में खरीदे जा गए और डेब्यू मैच की पहली ही गेंद पर छक्का जड़ा। खुद वैभव कई बार कह चुके हैं कि उनकी सफलता के पीछे माता-पिता की सबसे बड़ी भूमिका है। जिस पिता ने खेती और दुकान छोड़ी, जमीन बेची और अपने सपनों को बेटे के लिए कुर्बान किया, आज उसी पिता का सपना सच होता दिख रहा है। अब वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में भी इतिहास रच दिया है।