
Kho-Kho World Cup 2025: पहली बार खो-खो विश्व कप का आयोजन किया जा रहा है। जिसकी मेजबानी खुद भारत के हाथों में है। इसकी शुरुआत 13 जनवरी 2025 से होगी और इसका आखिरी मुकाबला 19 जनवरी को खेला जाएगा। सभी मुकाबले इंदिरा गांधी स्टेडियम नई दिल्ली और नोएडा इनडोर स्टेडियम में खेले जाएंगे। टीम इंडिया के पुरुष और महिला दल का ऐलान हो चुका है। जिसमें प्रतीक बैकर पुरुष कप्तान व प्रियंका इंगले महिला कप्तान होंगी। इस बड़े इवेंट से पहले तैयारी को लेकर पुरुष टीम के कोच अश्विनी शर्मा ने खुलकर बातचीत की है। उन्होंने टीम की रणनीति पर अपना विचार प्रकट किया है।
एशियानेट न्यूज के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के दौरान कोच अश्विनी शर्मा ने कहा कि "हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था, कि खो-खो खेल इस बड़े मुकाम तक पहुंचेगा। इस मुकाम तक पहुंचने में दो व्यक्ति का बहुत बड़ा हाथ है। जिसमें पहला नाम सुधांशु मित्तल (प्रेसिंडेट) और दूसरा एमएस त्यागी (जेनरल सेक्रेटरी) का है। मिट्टी से मैट तक और मैट से ग्लोबल तक इस खेल को पहुंचने में इनका बहुत बड़ा रोल है। इसी का नतीजा है, कि अब खो-खो वर्ल्ड कप का आयोजन हो रहा है।"
एक कोच के रूप में भूमिका को लेकर उन्होंने बताया कि "हमारा मुख्य फोकस खिलाड़ी को मेंटली और फिजिकल स्ट्रांग बनाना है। खिलाड़ी की मेंटालिटी को उसे तरह से बनाना है, कि उनका पूरा फोकस गेम पर ही बना रहे। उनका परफॉर्मेंस नीचे ना गिरे, बल्कि ऊपर की ओर जाए। इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए हम ट्रेनिंग प्रोग्राम शेड्यूल करते हैं। इसके अलावा हमने खिलाड़ियों के लिए साइकोलॉजी और योगा की क्लासेस भी रखे हैं। सभी बच्चों चयन के प्रति स्ट्रेस दूर करने के लिए मेडिटेशन करवाया जाता है।"
वर्ल्ड लेवल पर चुनौतियों को लेकर अश्विनी शर्मा ने बोला कि "मैं सुधांशु मित्तल और एमएस त्यागी का शुक्रिया अदा अदा करना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे वर्ल्ड कप के लिए मेंस टीम इंडिया का हेड कोच बनाया और बड़ी जिम्मेदारी दी। मेरा फोकस उनके विजन को पूरा करने का है। मैं खिलाड़ियों को नई ऊंचाईयों तक ले जाना चाहता हूं, जैसा उन्होंने मेरे ऊपर भरोसा जताया है। हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे और भारत के लिए गोल्ड कप लेकर आएंगे।"
Kho-Kho 2025: भारतीय कप्तान प्रतीक हर चुनौती के लिए हैं तैयार, बताया पूरा प्लान
लीडरशिप को लेकर मेंस कोच ने बताया कि "अलग-अलग राज्य से खिलाड़ी पहुंचते हैं। ट्रेनिंग के दौरान उनके स्वभाव और विचारों पर नजर रखी जाती हैं। खेल के बाद भी हम उन खिलाड़ियों के साथ लगातार बातचीत करते हैं। टीम को एक साथ मिलकर चलना सिखाते हैं। हम पूरी टीम को एकजुट रखने की कोशिश करते हैं।"
भारत में खेलने को लेकर उनका मानना है कि "भारत में हमें खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। सिलेक्टर्स द्वारा प्रतिभाशाली प्लेयरों को चुना गया है। उन्होंने एक बैलेंस टीम बनाई है, जो एक खेल के लिए जरूरी है। हमारे टीम में बेस्ट अटैकर हैं, डिफेंडर है, ऑल राउंडर हैं और वजीर भी हैं।"
गेम के नियम को लेकर अश्विनी शर्मा ने बताया कि "खो-खो गेम में पहले के मुकाबले कुछ बदलाव किए गए हैं। ग्राउंड को छोटा किया गया है। पहले 8 प्लेयर बैठते थे और 1 अटैक करता था। उसमें अब बदलाव करके 6 अटैकर और 1 एक्टिव अटैकर रख सकते हैं। वजीर को इंट्रोड्यूस किया गया है। बाकी अटैकर्स एक ही डायरेक्शन में जा सकते हैं, वह अपनी दिशा को बदल नहीं सकते हैं। लेकिन, वजीर के लिए कोई दिशा निर्धारित नहीं है। वह केवल सेंट्रल लाइन को क्रॉस नहीं कर सकता है। एक बैच आउट होने के बाद में 30 सेकंड का ब्रेक लिया जाएगा उसके बाद दूसरे बैच की शुरुआत होगी। इस बार ड्रीम रन को भी इंट्रोड्यूस किया गया है।"
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