Gervane Kastaneer: एक आंख की 70% रोशनी खोई, फिर भी देश को वर्ल्ड कप खिलाने का सपना नहीं छोड़ा

Published : Jun 13, 2026, 03:54 PM IST
Gervane Kastaneer

सार

कुरासाओ के फुटबॉलर गेरवाने कास्टनीर ने 2017 में गंभीर आँख की चोट के बाद शानदार वापसी की। एक आँख की 30% रोशनी खोने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने देश के लिए एक प्रमुख खिलाड़ी बने।

किस्सा फुटबॉल काः सिर्फ डेढ़ लाख की आबादी वाला एक छोटा सा देश दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाने जा रहा है - कुरासाओ। ह्यूस्टन के मैदान पर उस देश के 21 खिलाड़ी उतरते हैं। लेकिन उनमें से एक के लिए ये पल बेहद जज़्बाती है। वो सोच रहा है कि लोगों के इस शोर को वो कैसे अपने अंदर समेटेगा।।। उस खिलाड़ी का नाम है - गेरवाने कास्टनीर।

वर्ल्ड कप से ठीक पहले कास्टनीर को उनके पिता ने एक चिट्ठी लिखी। उसमें लिखा था।

"मेरे प्यारे दोस्त, मेरे गर्व, जिस दिन हमने तुम्हारे नन्हे पैरों में वो गेंद देखी थी, हमें महसूस हो गया था कि तुममें कुछ खास है। यह सिर्फ टैलेंट नहीं था, बल्कि एक ऐसा सपना था जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। तुमने फुटबॉल के लिए जिया, एक प्रोफेशनल फुटबॉलर बनने का सपना देखा और उसे पूरा भी किया।"

"लेकिन, 2017 का वो जनवरी का महीना सब कुछ बदल गया। तुम अपनी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत दिनों से निकलकर एक अंधेरे दौर में चले गए। दुनिया ने सिर्फ तुम्हारी आंखों की चोट देखी, लेकिन उसके पीछे का दर्द, अनिश्चितता, डर और आंसू। वो सब सिर्फ हमने देखे।"

"ऐसा लगा जैसे फुटबॉल तुमसे दूर जा रहा है, लेकिन तुमने हार नहीं मानी। जब दुनिया उम्मीद छोड़ चुकी थी, तब भी तुम अपने सपने के लिए लड़ते रहे। आज मुझे तुम पर बहुत गर्व है, पूरे कुरासाओ को तुम पर गर्व है। ढेर सारा प्यार।"

चिट्ठी खत्म होते-होते कास्टनीर की आंखें भर आईं। उन्हें शायद वो जनवरी का दिन याद आ गया होगा।

तब कास्टनीर ADO डेन हाग के लिए खेलते थे, जो डच फुटबॉल की सेकंड-टियर लीग है। उस दिन मुकाबला PEC ज़्वॉले से था। मैच के दसवें मिनट में ही कास्टनीर अपनी टीम के हीरो बन गए। लेकिन मैदान पर उनके लिए गोल की खुशी से ज़्यादा कुछ और ही इंतज़ार कर रहा था।

एक तेज़ शॉट सीधा कास्टनीर के चेहरे पर, उनकी आंख पर आकर लगा। अचानक उनकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया। चारों तरफ की आवाजें गूंजने लगीं और मैदान हिलता हुआ महसूस हुआ होगा।

टीम के डॉक्टर दौड़कर कास्टनीर के पास पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर का हाथ पकड़ा और मैदान से बाहर चले गए। कास्टनीर को तब भी समझ नहीं आ रहा था कि हुआ क्या है। उन्होंने डॉक्टर से पूछा, "क्या मैं एक आंख से खेल सकता हूं? बस हां या ना में बताइए।" उनका सवाल इतना सहज था, मानो आंख में कोई तिनका चला गया हो।

गेंद लगने से उनकी आंख के रेटिना में टियर (एक तरह का फटना) आ गया था। इस चोट ने सिर्फ उनकी नज़र ही नहीं, बल्कि उनके करियर को भी अंधेरे में धकेल दिया। उनकी एक आंख की रोशनी 30% तक ही रह गई। ये वो समय था जब जर्मन क्लब FSV मेंज़ ने कास्टनीर के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था, लेकिन आंख की इस गंभीर चोट ने उस सपने पर ब्रेक लगा दिया।

लेकिन कास्टनीर ने इन दिनों को किसी चीज़ का अंत नहीं माना। उनका लक्ष्य साफ था - मैदान पर लौटना। अस्पताल के बिस्तर पर भी वो बस इसी बारे में सोचते थे। अगले ही साल, कास्टनीर ने कैसेरस्लॉटरन क्लब की जर्सी पहनी और उसके बाद सात और क्लबों के लिए खेले।

नीदरलैंड्स में जन्मे कास्टनीर 2018 में कुरासाओ की नेशनल टीम से जुड़े। कुरासाओ के लिए भी उनके बूट्स ने गोल दागना जारी रखा। वर्ल्ड कप क्वालिफायर राउंड में कास्टनीर ने आठ मैच खेले और पांच गोल दागे। उन्होंने उस छोटे से द्वीपीय देश को ऐसे पल दिए, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।

PREV
Read more Articles on

Recommended Stories

U-17 World Wrestling News: उम्र में की हेराफेरी, 500 पहलवान नेशनल चैंपियनशिप से एक झटके में बाहर!
FIFA World Cup 2026: अमेरिका का धमाका, पराग्वे को 4-1 से रौंदकर ग्रुप डी में धमाकेदार एंट्री