
बिहार विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही सियासी दांव-पेंच भी तेज हो गए हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को अचानक जेडीयू के प्रदेश दफ्तर पहुंचे। उनके साथ शिक्षा मंत्री विजय चौधरी भी मौजूद थे। वहां आयोजित अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की विशेष बैठक में शामिल होकर सीएम ने साफ संदेश दिया कि आगामी चुनाव में अल्पसंख्यक समाज पर जेडीयू की पैनी नजर है।
नीतीश कुमार के पहुंचते ही पार्टी कार्यालय में गहमागहमी बढ़ गई। बैठक में जेडीयू के कई वरिष्ठ मुस्लिम नेता भी मौजूद रहे। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बैठक पूरी तरह से अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने पर केंद्रित थी। विजय चौधरी ने बैठक के बाद कहा, “अल्पसंख्यक समाज ने हमेशा नीतीश कुमार पर भरोसा किया है। इस बार भी उनका झुकाव मजबूती से एनडीए और जेडीयू की ओर है।”
बैठक में नीतीश सरकार की उन योजनाओं का खास तौर पर जिक्र हुआ, जो अल्पसंख्यक समाज के लिए लागू की गई थीं—चाहे वह शिक्षा में छात्रवृत्ति हो या रोजगार से जुड़ी योजनाएं। पार्टी नेताओं ने दोहराया कि बिहार में जितना काम अल्पसंख्यकों के लिए हुआ है, उतना किसी दूसरे राज्य में नहीं हुआ।
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा, “मुख्यमंत्री ने खुद बैठक में आकर चुनावी रणनीति पर निर्देश दिए। मुस्लिम समाज एकजुट है और हमारे नेता नीतीश जी में आस्था रखता है। विपक्ष लाख कोशिश कर ले, लेकिन अल्पसंख्यक समाज जेडीयू के साथ ही रहेगा।”
राजनीतिक हलकों में इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। चुनावी घोषणा से पहले सीएम नीतीश का सीधे अल्पसंख्यक नेताओं से मिलना यह दिखाता है कि पार्टी अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। विशेषज्ञों का मानना है कि यह “अल्पसंख्यक कार्ड” जेडीयू की चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा है, जो एनडीए के लिए वोटों का समीकरण मजबूत कर सकता है।
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