बिहार: दूध पिलाने वाली कई मांओं के ब्रेस्ट में मिला यूरेनियम, स्टडी में बड़ा खुलासा

Published : Nov 23, 2025, 04:36 PM ISTUpdated : Nov 23, 2025, 05:11 PM IST
Bihar Breast Feeding

सार

बिहार के कई जिलों की स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध में यूरेनियम पाया गया। 70% बच्चों में नॉन-कार्सिनोजेनिक हेल्थ रिस्क का संकेत है, पर कुल स्तर सीमा से कम हैं और डॉक्टरों ने ब्रेस्टफीडिंग जारी रखने की सलाह दी है।

पटना/नई दिल्ली। हाल ही में हुई एक स्टडी में बिहार के कई जिलों में दूध पिलाने वाली मांओं के ब्रेस्ट मिल्क में यूरेनियम (U238) का खतरनाक लेवल सामने आया है, जिससे उनके बच्चों की हेल्थ को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। कई इंस्टीट्यूशन के रिसर्चर्स ने पाया है कि ब्रेस्ट मिल्क के जरिए यूरेनियम के संपर्क में आने से बच्चों को नॉन-कार्सिनाजेनिक संबंधी बड़े हेल्थ रिस्क हो सकते हैं।

40 दूध पिलाने वाली मांओं के ब्रेस्ट मिल्क का विश्लेषण

AIIMS दिल्ली के डॉ. अशोक शर्मा इस स्टडी के को-ऑथर हैं। उन्होंने कहा, "स्टडी में 40 दूध पिलाने वाली मांओं के ब्रेस्ट मिल्क को एनालाइज किया गया और सभी सैंपल में यूरेनियम (U-238) पाया गया। हालांकि 70% बच्चों में नॉन-कार्सिनोजेनिक वाला हेल्थ रिस्क दिखा, लेकिन कुल यूरेनियम लेवल तय लिमिट से कम था और उम्मीद है कि मांओं और बच्चों दोनों पर ही इसका हेल्थ पर बहुत कम असर पड़ेगा।

सबसे ज्यादा इंडिविजुअल वैल्यू बिहार के खगड़िया में

सबसे ज्यादा एवरेज कंटैमिनेशन खगड़िया जिले में पाया गया, जबकि सबसे ज्यादा इंडिविजुअल वैल्यू कटिहार जिले में पाई गई। हालांकि, यूरेनियम के संपर्क में आने से न्यूरोलॉजिकल डेवलपमेंट में रुकावट और IQ में कमी जैसे रिस्क हो सकते हैं, लेकिन ब्रेस्टफीडिंग बंद नहीं करनी चाहिए और जब तक क्लिनिकली संकेत न दिया जाए, यह बच्चों के न्यूट्रिशन का सबसे फायदेमंद सोर्स है।"

बच्चों को ब्रेस्ट मिल्क पिलाते रहने की सलाह

"स्टडी से पता चला कि 70% बच्चों का HQ > 1 था, जो ब्रेस्ट मिल्क के ज़रिए यूरेनियम के संपर्क में आने से होने वाले नॉन-कार्सिनोजेनिक हेल्थ रिस्क को दिखाता है। बच्चों में यूरेनियम के संपर्क में आने से किडनी के विकास, न्यूरोलॉजिकल ग्रोथ, कॉग्निटिव और मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, ब्रेस्ट मिल्क के सैंपल (0-5.25 ug/L) में देखे गए यूरेनियम कन्संट्रेशन के आधार पर, स्टडी अभी ये भी कहती है कि बच्चे की हेल्थ पर रियल में ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। दरसअल, मांओं द्वारा एब्जॉर्ब किया गया ज्यादातर यूरेनियम मुख्य रूप से यूरिन के जरिए निक जाता है और ब्रेस्ट मिल्क में कंसंट्रेटेड नहीं होता। इसलिए, ब्रेस्टफीडिंग की सलाह दी जाती है, जब तक कि कोई क्लिनिकल संकेत कुछ और न बताए। उन्होंने कहा।

स्टडी के लिए बिहार के अलग-अलग जिलों से लिए 40 सैंपल

डॉ. अशोक ने यह भी कहा कि हेवी मेटल्स की मौजूदगी के बारे में जानने के लिए दूसरे राज्यों में भी ऐसी स्टडी की जाएंगी। "हम दूसरे राज्यों में हेवी मेटल्स और इंसानी हेल्थ पर उनके असर की जांच कर रहे हैं, जो आज के समय की जरूरत है।" यह स्टडी बिहार के अलग-अलग जिलों से रैंडम तरीके से चुनी गई 40 दूध पिलाने वाली महिलाओं पर की गई, जिसमें ब्रेस्ट मिल्क में U238 की मात्रा का पता लगाया गया। टेस्ट किए गए सभी सैंपल में यूरेनियम था और सबसे ज़्यादा लेवल कटिहार जिले में देखा गया।

बच्चे अपने शरीर से नहीं निकाल पाते यूरेनियम

हेल्थ रिस्क असेसमेंट से पता चला है कि बच्चे अपने शरीर से यूरेनियम को निकालने की कम क्षमता के कारण खास तौर पर कमजोर होते हैं। स्टडी का अनुमान है कि एनालाइज़ किए गए बच्चों में से 70 परसेंट को इसके संपर्क में आने से नॉन-कैंसरोजेनिक हेल्थ इफेक्ट हो सकते हैं। यूरेनियम, एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रेडियोएक्टिव एलिमेंट है, जो आमतौर पर ग्रेनाइट और दूसरी चट्टानों में पाया जाता है। यह प्राकृतिक प्रोसेस और इंसानी कामों जैसे माइनिंग, कोयला जलाना, न्यूक्लियर इंडस्ट्री से निकलने वाले एमिशन और फॉस्फेट फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से ग्राउंडवाटर को खराब कर सकता है।

 

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