
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के संगोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण समारोह में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है।मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की रही है। हमारे यहां नदियों, पर्वतों, वृक्षों और जीव-जंतुओं को सम्मान दिया गया है। यही कारण है कि भारतीय जीवन दर्शन प्रकृति के उपयोग की बात करता है, उसके शोषण की नहीं।
अपने संबोधन में ओ.पी. चौधरी ने कहा कि दुनिया आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा और बाढ़ जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि यह संकट असंतुलित विकास मॉडल का परिणाम है, जिसमें प्रकृति के संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया गया। उन्होंने कहा कि कभी भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था था, लेकिन उस दौर में पर्यावरण संकट जैसी चुनौतियां नहीं थीं क्योंकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना हुआ था। आज आवश्यकता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।
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मंत्री चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय निगरानी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाले उत्सर्जन की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था विकसित की गई है। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ते ही विभाग को तुरंत सूचना मिल सकेगी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी। इसके अलावा फ्लाई ऐश के परिवहन और निपटान के लिए जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया गया है। सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि दूसरे राज्यों का फ्लाई ऐश छत्तीसगढ़ में डंप न हो। खतरनाक अपशिष्टों के प्रबंधन को लेकर भी सख्त कदम उठाए गए हैं।
कार्यक्रम का सबसे चर्चित ऐलान नवा रायपुर को ‘पीपल सिटी’ के रूप में विकसित करने की योजना रही। मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि आने वाले वर्षों में नवा रायपुर में 20 हजार से अधिक पीपल के पेड़ लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पीपल, नीम, आम और अन्य देशी वृक्ष पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने अपने कलेक्टर कार्यकाल में शुरू किए गए ‘पीपल फॉर पीपल’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इस पहल को और बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी आदतों से शुरू होता है। बिजली की बचत, प्लास्टिक का कम उपयोग, पौधों की देखभाल और स्थानीय प्रजातियों का वृक्षारोपण समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने शिक्षकों और ईको क्लब समन्वयकों से बच्चों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का आग्रह किया। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ी की सोच बदलकर ही स्थायी परिवर्तन संभव है।
युवाओं को संबोधित करते हुए मंत्री चौधरी ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक रिसाइक्लिंग, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल स्टार्टअप्स भविष्य के सबसे बड़े अवसरों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि रोजगार, नवाचार और उद्यमिता का भी उभरता हुआ क्षेत्र है। युवाओं को इस दिशा में आगे बढ़कर नए अवसर तलाशने चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा विकसित सीजी निगरानी पोर्टल, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर आधारित फिल्म, मंडल की 25 वर्षों की उपलब्धियों पर लघु फिल्म, नई वेबसाइट और ईको क्लब गतिविधियों की स्मारिका का लोकार्पण किया गया। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक ‘किस्सा लकड़ी का’ प्रस्तुत कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही पोस्टर प्रतियोगिता और विभिन्न पर्यावरणीय गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों, विद्यालयों और ईको क्लबों को सम्मानित भी किया गया।
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