
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों से जनगणना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री की इस अपील को साझा करते हुए कहा कि जनगणना सिर्फ आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बेहतर नीतियां बनाने और नागरिकों तक प्रभावी सार्वजनिक सेवाएं पहुंचाने का आधार भी है।
रेखा गुप्ता ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि अब तक करीब 32 करोड़ परिवारों की गणना की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि 16 भाषाओं में सुविधा और Self-Enumeration यानी स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध होने से इस बार की जनगणना को नागरिकों के लिए ज्यादा आसान और सुविधाजनक बनाया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि देश के करीब 32 करोड़ परिवारों की गणना पूरी हो चुकी है। उन्होंने नागरिकों से इस राष्ट्रीय अभ्यास में पूरी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। उनके मुताबिक, जनगणना से मिलने वाले सटीक आंकड़े सरकार के लिए नीतियां तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों को समझने, सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने और विकास योजनाओं को ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलती है।
Hon’ble Prime Minister Shri @narendramodi Ji has called upon every citizen to participate wholeheartedly in the Census and contribute to this important national exercise.
Nearly 32 crore families have already been enumerated. With 16 languages and the facility of… pic.twitter.com/T5H5oDpYDC— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 28, 2026
Census 2027 की सबसे अहम नई विशेषताओं में Self-Enumeration सुविधा शामिल है। पहली बार नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से अपने परिवार से जुड़ी जानकारी खुद दर्ज करने का विकल्प दिया गया है। यह सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है, जिसमें हिंदी और अंग्रेजी के अलावा असमिया, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू शामिल हैं।
स्व-गणना पूरी करने के बाद एक Self-Enumeration ID जारी होती है। इसके आधार पर बाद में गणनाकर्मी जानकारी का सत्यापन कर सकते हैं। सरकार ने इसे नागरिकों की सुविधा बढ़ाने और जनगणना प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
Census 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना है। इस प्रक्रिया में गणनाकर्मी मोबाइल एप के जरिए सीधे डेटा एकत्र और जमा करेंगे। इसके साथ Census Management and Monitoring System के जरिए काम की निगरानी भी की जा रही है।
सरकार के अनुसार, डिजिटल व्यवस्था से डेटा संग्रह और निगरानी की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए भी अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। जनगणना से जुटाई गई व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखने और केवल समेकित आंकड़े जारी करने का प्रावधान है।
जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण में House Listing and Housing Census यानी मकानों और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। इसमें घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और परिवार के पास मौजूद संपत्तियों जैसी जानकारी शामिल है।
दूसरे चरण में Population Enumeration यानी जनसंख्या गणना होगी। इसमें लोगों से जुड़े जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवासन और अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जाएगी। इस चरण में जाति गणना को भी शामिल किया गया है। सरकारी जानकारी के अनुसार, Census 2027 भारत की 16वीं जनगणना और आजादी के बाद 8वीं जनगणना है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टाल दी गई थी।
रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि सटीक डेटा प्रभावी शासन की बुनियाद है। आबादी, परिवारों की स्थिति, आवास, शिक्षा, रोजगार, प्रवासन और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े सरकार को योजनाओं की जरूरत और उनके असर को समझने में मदद करते हैं। सरकार भी Census 2027 को evidence-based policymaking यानी आंकड़ों पर आधारित नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण मान रही है। इसके लिए केंद्र सरकार ने ₹11,718.24 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है।
ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की अपील और रेखा गुप्ता का संदेश नागरिकों की भागीदारी पर जोर देता है। जनगणना में सही जानकारी देना सिर्फ आंकड़े दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में विकास और सार्वजनिक सेवाओं की योजना तैयार करने के लिए भी अहम माना जा रहा है।
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