
नई दिल्ली। दिल्ली के लाखों बच्चों की शुरुआती शिक्षा और देखभाल में अहम भूमिका निभाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत जल्द ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया जाएगा और उनके योगदान के सम्मान के लिए विशेष पहल की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी दीदियां बच्चों के जीवन के शुरुआती दौर में सिर्फ शिक्षा या देखभाल का काम नहीं करतीं, बल्कि उनके भीतर संस्कार और सामाजिक मूल्यों की नींव रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरकार अब उनके सम्मान, कल्याण और सशक्तिकरण को लेकर आगे कदम बढ़ाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जाएगी। इसके साथ ही उन्हें उनके काम के लिए जरूरी किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान में अभी बढ़े हुए स्टाइपेंड की नई राशि या इसे लागू करने की निश्चित तारीख का विवरण नहीं दिया गया है।
सरकार का कहना है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रोजाना बच्चों और परिवारों के साथ सीधे जुड़कर काम करती हैं। ऐसे में उनके काम को केवल एक नियमित जिम्मेदारी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके लिए बेहतर सुविधाएं और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है।
दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत आंगनवाड़ी सेवाएं बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती देखभाल से जुड़ी हैं। दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक राजधानी में 10,897 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों में शुरुआती बाल देखभाल और शिक्षा को भी आंगनवाड़ी सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक दिल्ली के सभी 10,897 आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए ‘खेल पिटारा’ उपलब्ध कराया गया है। इसमें शुरुआती शिक्षा और बच्चों के विकास से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की व्यवस्था है। यानी आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका सिर्फ पोषण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। छोटे बच्चों के शुरुआती सीखने, देखभाल और विकास में भी इन केंद्रों की जिम्मेदारी है।
दिल्ली सरकार के उपलब्ध दस्तावेजों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय का भी उल्लेख है। महिला एवं बाल विकास विभाग की जानकारी के अनुसार आंगनवाड़ी वर्कर और हेल्पर के मानदेय में केंद्र और दिल्ली सरकार की हिस्सेदारी शामिल है। विभाग के रिकॉर्ड में आंगनवाड़ी वर्कर के लिए ₹11,220 और हेल्पर के लिए ₹5,610 मासिक मानदेय दर्ज है। इसके अलावा काम की प्रकृति को देखते हुए कन्वेयंस और कम्युनिकेशन अलाउंस का भी प्रावधान बताया गया है। ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने की घोषणा को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए अतिरिक्त आर्थिक राहत के प्रस्ताव के तौर पर देखा जा रहा है। नई राशि और लागू होने की शर्तों का आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सरकार आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेगी। इस संवाद का मकसद उनके काम, जरूरतों और रोजमर्रा की चुनौतियों को समझना भी होगा। सरकार का संदेश साफ है कि जो महिलाएं दिल्ली के बच्चों के भविष्य से सीधे जुड़ी हैं, उनके सम्मान और कल्याण पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसी क्रम में उन्हें जरूरी किट उपलब्ध कराने और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की बात कही गई है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने स्टाइपेंड बढ़ाने का संकेत दिया है, लेकिन नई राशि, किट में शामिल सामग्री और योजना की विस्तृत समयसीमा का इंतजार है। इन बिंदुओं पर सरकार की ओर से विस्तृत आदेश या घोषणा आने के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलने वाले वास्तविक लाभ की तस्वीर साफ होगी।
दिल्ली में आंगनवाड़ी व्यवस्था पहले से ही बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती शिक्षा के कार्यक्रमों से जुड़ी हुई है। ऐसे में कार्यकर्ताओं के मानदेय और काम से जुड़े संसाधनों में प्रस्तावित बदलाव का असर इस पूरी व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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