
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 9वें राष्ट्रीय पोषण माह और ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया। इस मौके पर उन्होंने आंगनवाड़ी दीदियों की भूमिका को बच्चों के शुरुआती जीवन की बुनियाद से जोड़ते हुए कहा कि घर के बाद बच्चे को पहली सीख, पहला पोषण और पहला स्नेह देने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका होती है।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि आंगनवाड़ी बहनें हर दिन अनगिनत छोटे-छोटे सपनों को संवारने का काम करती हैं। कभी वे मां की तरह बच्चों को दुलारती हैं तो कभी शिक्षक की भूमिका निभाकर उन्हें सीखने के लिए तैयार करती हैं। उनके अनुसार, बच्चों के स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करने में इन कार्यकर्ताओं की सेवा का महत्व बहुत बड़ा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्षों में पोषण, देखभाल और सीखने का माहौल बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आंगनवाड़ी केंद्र केवल पोषण उपलब्ध कराने की जगह नहीं, बल्कि बच्चों और परिवारों से सीधे जुड़ा जमीनी केंद्र भी हैं। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राजधानी में 10,897 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों को शुरुआती बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा से जोड़ने के लिए सभी केंद्रों में ‘खेल पिटारा’ यानी प्री-एजुकेशन किट उपलब्ध कराई गई है। यानी आंगनवाड़ी व्यवस्था में अब पोषण के साथ-साथ बच्चों के शुरुआती मानसिक और शैक्षणिक विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।
बच्चे के जीवन की पहली सीख, पहला पोषण और घर के बाद पहला स्नेह… इन सबके केंद्र में हमारी आंगनवाड़ी दीदियां हैं। 9वें राष्ट्रीय पोषण माह एवं ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम में आंगनवाड़ी बहनों का सम्मान किया।
हर दिन वे न जाने कितने नन्हे सपनों को सहेजती… pic.twitter.com/vead5wDVxX— Rekha Gupta (@gupta_rekha) September 24, 2026
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का संकल्प है कि बच्चों के भविष्य को आकार देने वाली आंगनवाड़ी बहनों का सम्मान भी बढ़े। उन्हें सशक्त बनाया जाए और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनका यह संदेश ऐसे समय आया है जब देशभर में 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 2026 मनाया जा रहा है। इस साल राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। अभियान का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास के लिए समुदाय की भागीदारी वाले केंद्र के रूप में मजबूत करना है।
राष्ट्रीय पोषण माह 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान आहार में विविधता, पर्याप्त प्रोटीन, आंगनवाड़ी केंद्रों पर ताजा पका भोजन, सामुदायिक भागीदारी और बच्चों के शुरुआती विकास जैसे विषयों पर जोर दिया जा रहा है।
आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका अब सिर्फ बच्चों को पूरक पोषण देने तक सीमित नहीं है। मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के मुताबिक देशभर में 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्र 7.5 करोड़ से अधिक बच्चों और 1.10 करोड़ गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य और शुरुआती बाल देखभाल से जुड़ी सेवाएं दे रहे हैं।
इस साल के पोषण माह में आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों के जरिए स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और पोषण सेवाओं में जवाबदेही मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मेन्यू बोर्ड के जरिए लाभार्थियों को मिलने वाली सेवाओं और भोजन की जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में भी पहल की गई है।
दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय ₹12,720 और आंगनवाड़ी सहायिकाओं का ₹6,810 है, जो मार्च 2022 से लागू संशोधित दर है। ऐसे में मुख्यमंत्री का आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सशक्त करने और उन्हें बेहतर सुविधाएं देने का संदेश इस व्यवस्था में काम करने वाली जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर सरकार के रुख को सामने रखता है।
‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम में नगर निगम पार्षद श्रीमती अनीता जैन समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान को रेखांकित किया गया और बच्चों के पोषण तथा बेहतर भविष्य के लिए उनके काम को महत्वपूर्ण बताया गया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के संदेश का मूल फोकस यही रहा कि बच्चों के जीवन की शुरुआत को मजबूत बनाने वाली इन कार्यकर्ताओं को सिर्फ सेवा देने वाली कर्मी के तौर पर नहीं, बल्कि बच्चों के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाए। उनका सम्मान, सुविधाएं और सशक्तिकरण भी उसी दिशा में आगे बढ़े।
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