
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पशु कल्याण कार्यकर्ता जागृति मिश्रा को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री ने जूनियर इंजीनियर के आचरण की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पुलिस को केस दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। जागृति मिश्रा को पशु आश्रय स्थल शुरू करने में मदद देने के लिए जिलाधिकारी को भी आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने सीएम रिलीफ फंड से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन भी दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा कि उनकी सरकार नागरिकों के उत्पीड़न और सरकारी अधिकारों के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेगी। मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पशु कल्याण कार्यकर्ता जागृति मिश्रा को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि उन्हें अपनी गतिविधियां जारी रखने और पशु आश्रय स्थल स्थापित करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस मामले में मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि किसी भी नागरिक को अनुचित तरीके से परेशान करना या अपने पद का गलत इस्तेमाल करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं।
We have taken all necessary action to ensure that animal welfare activist Jagriti Mishra receives every possible support.
An inquiry into the Junior Engineer’s conduct has been ordered, and police have been directed to register a case against those responsible. District Magistrate has been instructed to assist her in setting up the animal shelter.
Financial assistance of ₹5 lakh from CM Relief Fund has also been assured.
Our government will not tolerate harassment of citizens or misuse of authority. Those found guilty will face strict action under the law.
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) October 25, 2026
मुख्यमंत्री ने संबंधित जूनियर इंजीनियर के व्यवहार और आचरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि मामले में किसी अधिकारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया या अपने कर्तव्यों का पालन करने में नियमों की अनदेखी की। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि मामले की जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी अधिकारी की गलती या अनुचित आचरण की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जा सकते हैं। यह जांच इसलिए भी अहम है, क्योंकि सरकारी अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने पद और अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर करें। किसी शिकायत को नजरअंदाज करने या किसी नागरिक को अनुचित रूप से परेशान करने की स्थिति में जवाबदेही तय होना जरूरी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुलिस को मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं। इसका उद्देश्य मामले में सामने आए आरोपों की कानूनी जांच सुनिश्चित करना और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई का रास्ता साफ करना है। हालांकि, पुलिस की जांच और संबंधित तथ्यों की पुष्टि के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के निर्देशों से यह संकेत मिला है कि सरकार इस प्रकरण में केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी कराना चाहती है। किसी भी मामले में आरोपों की निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है। दोष तय करने की प्रक्रिया संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही पूरी की जाएगी।
जागृति मिश्रा को पशु आश्रय स्थल स्थापित करने में मदद देने के लिए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं। पशु आश्रय स्थल का उद्देश्य जरूरतमंद और बेसहारा जानवरों को सुरक्षित जगह उपलब्ध कराने के साथ उनकी देखभाल के लिए जरूरी व्यवस्था तैयार करना होता है। ऐसे केंद्रों के संचालन में जगह, प्रशासनिक सहयोग, साफ-सफाई, भोजन और पशुओं की देखरेख जैसी कई जरूरतें होती हैं। जिला प्रशासन की मदद से इन व्यवस्थाओं को तैयार करने में सहूलियत मिल सकती है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, जिलाधिकारी को जागृति मिश्रा की सहायता करनी है, ताकि पशु आश्रय स्थल स्थापित करने की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग मिल सके। इससे पशु कल्याण के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जागृति मिश्रा के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष (CM Relief Fund) से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। इस सहायता का उद्देश्य उन्हें जरूरी सहयोग उपलब्ध कराना है। सरकार की ओर से आर्थिक सहायता के साथ प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर भी कदम उठाने की बात कही गई है। यानी इस मामले में मदद का दायरा केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है। पशु आश्रय स्थल स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग और मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निर्देश भी इसी क्रम का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनकी सरकार नागरिकों के उत्पीड़न और सरकारी अधिकारों के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने भरोसा दिया कि मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह बयान प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सरकारी अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे निष्पक्षता से काम करें और नागरिकों के साथ नियमों के मुताबिक व्यवहार करें। यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकायत आती है, तो उसकी जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल इस मामले में मुख्यमंत्री ने जांच, पुलिस कार्रवाई, जिला प्रशासन की सहायता और आर्थिक सहयोग से जुड़े निर्देश दिए हैं। अब आगे की कार्रवाई में जांच के निष्कर्ष और संबंधित अधिकारियों के कदम अहम होंगे।
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