
नई दिल्ली। लेफ्ट छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने शुक्रवार को चुनाव आयोग के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का फिर से आह्वान किया है। मध्य दिल्ली में कड़ी सुरक्षा के बीच, सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी लोगों से अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग किसी राजनीतिक पार्टी या संगठन के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं, बल्कि आम नागरिक बनकर जंतर-मंतर पहुंचें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में प्रशांत भूषण ने लिखा कि यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार और उनके 'आकाओं' द्वारा लोकतंत्र को 'हाईजैक' करने के खिलाफ है। उन्होंने साफ किया कि यह कोई दलगत या राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे अपनी व्यक्तिगत हैसियत से आएं। उन्होंने कहा, “लोग नागरिक बनकर आएं, किसी पार्टी या संगठन के प्रतिनिधि के रूप में नहीं। अपने साथ किसी भी पार्टी या संगठन का पोस्टर न लाएं।” गांधी जयंती के मौके पर इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन बताते हुए भूषण ने कहा कि उकसावे के बावजूद शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा, "गांधी जयंती पर यह एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन है। इसलिए किसी भी उकसावे के बावजूद लोगों को शांतिपूर्ण रहना चाहिए। अगर पुलिस जबरन रोकती है, तो उन्हें वहीं सत्याग्रह पर बैठ जाना चाहिए।"
Today’s protest at Jantar Mantar and elsewhere in the country is a citizens protest against the hijacking of our democracy by Gyanesh Kumar and his handlers. Though many organizations and parties have endorsed the call, it is not a partisan protest. People should come as citizens…
— Prashant Bhushan (@pbhushan1) October 2, 2026
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह प्रदर्शन वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर हो रहा है। पुलिस ने इस प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी है। पुलिस के आदेश के मुताबिक, बिना लिखित अनुमति के पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने, धरना देने, नारेबाजी करने और भाषण देने पर रोक है। इसके अलावा हथियार, बैनर, तख्तियां, लाठी, तलवार, डंडे, ईंट-पत्थर या ऐसी कोई भी चीज ले जाने पर भी पाबंदी है। नागरिकों और बाहर से आने वाले लोगों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने और किसी भी गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा न बनने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,
नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू है। यहां किसी भी तरह के प्रदर्शन, मार्च या ऐसी गतिविधियों की इजाजत नहीं है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और सभी से कानून का पालन करने व पुलिस का सहयोग करने की अपील है। चूंकि धारा 163 लागू है, इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे प्रदर्शन के लिए इस इलाके में न आएं। सड़कों और मेट्रो सेवाओं को लेकर जरूरी सर्कुलर, नोटिफिकेशन और पब्लिक अवेयरनेस मैसेज जारी किए जा रहे हैं।
जंतर-मंतर पर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के साथ दंगा नियंत्रण वाहन तैनात किए गए हैं। इलाके की तरफ जाने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि भीड़ जुटने की आशंका को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने अगले आदेश तक 11 स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद कर दिए हैं। इनमें जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, INA, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली स्टेशन शामिल हैं। हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय पर इंटरचेंज की सुविधा चालू रहेगी।
लेफ्ट छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान करते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग और खासकर CEC ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र को हाईजैक कर रहे हैं। कांग्रेस की यूथ विंग ने भी चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकालने का ऐलान किया है, क्योंकि पार्टी ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना 4 दिन का आंदोलन शुरू कर दिया है। यह पूरा विवाद 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने के अंदर कम से कम 14 बार SIR प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य फैसलों पर आपत्ति जताई थी।
इससे पहले, आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने गुरुवार को लोगों से सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की थी। उन्होंने X पर लिखा, “चलो जंतर-मंतर 2 अक्टूबर 2026 सुबह 10 बजे।” एक वीडियो संदेश में आतिशी ने कहा, "1947 में जब भारत आजाद हुआ, तो हमें सबसे बड़ा अधिकार वोट देने का मिला था। लेकिन आज बीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के जरिए हमसे यह अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। अगर वोट देने का अधिकार खतरे में है, तो इसका मतलब है कि हमारा लोकतंत्र खतरे में है।"
चलो जंतर मंतर
2 अक्टूबर 2026
सुबह 10 बजे#ChunavAayogThikKaro pic.twitter.com/nS0Hgab17u— Atishi (@AtishiAAP) October 1, 2026
AAP सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर वोटर लिस्ट से 1.37 करोड़ नाम काट दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “देश में SIR के नाम पर 1 करोड़ 37 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है। मोदी, भारतीय जनता पार्टी और ज्ञानेश कुमार द्वारा पूरे देश में चुनाव को प्रभावित करने की यह एक गहरी साजिश है।” संजय सिंह ने आगे कहा, “भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिए जंतर-मंतर पहुंचें। वोट चोर ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए जंतर-मंतर पहुंचें।”
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