
दिल्ली में सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने और यमुना नदी की सफाई के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। श्याम नगर के फेज-1 में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 43 सीवरेज और जल शोधन परियोजनाओं का उद्घाटन किया और कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं की कुल लागत ₹8,941 करोड़ से अधिक बताई गई है।
इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार ने सीवरेज प्रबंधन और जल शोधन से जुड़े कई अहम कामों में तेजी लाई है। इनमें 29 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजनाएं, मौजूदा एसटीपी का उन्नयन, घरों को सीवर कनेक्शन देना और सीवर नेटवर्क का विस्तार शामिल है। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिससे सीवरेज का पानी बिना उचित उपचार के यमुना में जाने से रोका जा सके। मुख्यमंत्री ने यमुना को स्वच्छ बनाने के साथ उसके निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
दिल्ली जल बोर्ड की इन 43 परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹8,941.22 करोड़ है। इनमें 2,827.11 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं का लोकार्पण और 6,114.11 करोड़ रुपये की 33 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है। यानी यह योजना सिर्फ नई परियोजनाएं शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा जल और सीवरेज ढांचे को भी बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
बाहरी दिल्ली में प्रस्तावित 29 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज पंपिंग स्टेशन इस योजना का अहम हिस्सा हैं। इनसे 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों को सीवरेज सुविधा के दायरे में लाने का लक्ष्य है। सरकार के मुताबिक, इससे लगभग 36.29 लाख लोगों को लाभ मिल सकता है। विकेंद्रीकृत एसटीपी की खासियत यह है कि जहां बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाना संभव नहीं होता, वहां स्थानीय स्तर पर सीवेज का उपचार किया जा सकता है। इससे सीवर नेटवर्क में मौजूद कमियों को दूर करने और गंदे पानी के प्रबंधन में मदद मिल सकती है। दिल्ली में कई ऐसी कॉलोनियां और इलाके हैं, जहां सीवरेज नेटवर्क की कमी के कारण गंदा पानी नालों तक पहुंच जाता है। ऐसे क्षेत्रों में सीवर कनेक्शन और उपचार की व्यवस्था विकसित करना यमुना में प्रदूषण कम करने के लिए जरूरी है।
योजना में केवल सीवरेज ही नहीं, बल्कि पेयजल से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी शामिल है। चंद्रावल में 477 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र विकसित किया जाएगा। इसकी लागत करीब 298.3 करोड़ रुपये बताई गई है। इस परियोजना का उद्देश्य पुराने जल शोधन ढांचे को बदलना और लगभग 22 लाख लोगों की जरूरतों को पूरा करना है। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग और वितरण व्यवस्था पर दबाव बना रहता है। जल शोधन क्षमता बढ़ने से आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ परियोजना के पूरा होने और उसके संचालन पर निर्भर करेगा।
दिल्ली में यमुना प्रदूषण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। नदी में गंदे पानी का प्रवाह रोकने के लिए केवल घाटों की सफाई पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सीवेज को इकट्ठा करना, उसका उचित उपचार करना और सीवर नेटवर्क की कमियों को दूर करना जरूरी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने परियोजनाओं के जरिए यमुना को स्वच्छ और उसके प्रवाह को निर्बाध बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं, दिल्ली सरकार की योजना का मुख्य उद्देश्य सीवरेज ढांचे को इस तरह विकसित करना है कि अनुपचारित गंदा पानी नालों के रास्ते नदी में न पहुंचे।
इन परियोजनाओं का असर इस बात से तय होगा कि सीवर कनेक्शन कितनी तेजी से उपलब्ध कराए जाते हैं, एसटीपी निर्धारित मानकों के मुताबिक काम करते हैं या नहीं और पूरे नेटवर्क का रखरखाव किस तरह किया जाता है। दिल्ली सरकार के अनुसार, सभी संबंधित कार्य पूरे होने में करीब दो से ढाई साल लग सकते हैं। इसके बाद अनुपचारित सीवेज के नालों और उनके जरिए यमुना तक पहुंचने पर रोक लगाने का लक्ष्य है।
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